केरल के पवित्र सबरीमाला मंदिर में मकर विलक्कु महोत्सव का आयोजन 14 जनवरी 2026, बुधवार को किया जाएगा। इसी दिन मकर संक्रांति भी है।
मकर संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर आरंभ होगा।
यह दिन भगवान अय्यप्पा के भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मकर विलक्कु सबरीमाला के सबसे प्रमुख और भव्य उत्सवों में से एक माना जाता है, जिसमें हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मकर विलक्कु का मुख्य आकर्षण: रहस्यमयी मकर ज्योति
मकर विलक्कु उत्सव का सबसे विशेष और प्रतीक्षित दृश्य है मकर ज्योति का दिव्य प्रकाश। यह ज्योति मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित पोन्नम बलामु पहाड़ी पर तीन बार प्रकट होती है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह पवित्र प्रकाश भगवान अय्यप्पा की दिव्य उपस्थिति और उनके आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
मकर विलक्कु के धार्मिक अनुष्ठान
मकर विलक्कु के दौरान सबरीमाला में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस पावन अवसर पर:
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भगवान अय्यप्पा को विशेष प्रार्थनाएं और भेंट अर्पित की जाती हैं
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मकर ज्योति के दर्शन को अत्यंत फलदायी माना जाता है
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मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों और पारंपरिक भजनों की गूंज सुनाई देती है
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भक्त कठोर अनुशासन, व्रत और संयम का पालन करते हैं
यह समय भक्तों के लिए आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का होता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मकर विलक्कु केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ी एक पवित्र यात्रा है। यह पर्व:
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भक्ति और श्रद्धा को सुदृढ़ करता है
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समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है
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केरल की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखता है
मकर विलक्कु 2026 आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण एक शक्तिशाली अवसर है, जहां भक्ति, परंपरा और दिव्य आशीर्वाद का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
वैश्विक आस्था का प्रतीक
अपनी गहन आध्यात्मिक महत्ता के कारण मकर विलक्कु न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में भगवान अय्यप्पा के लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
