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चीन एक नकली दलाई लामा सामने लाएगा: अमेरिकी लॉमेकर का सख्त अलर्ट

Date : 11-Jun-2026

10 जून ।  अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो चीन दलाई लामा का नकली उत्तराधिकारी नियुक्त करने की कोशिश कर सकता है।

रिपब्लिकन सांसद मैककॉल ने इस हफ्ते कमिटी की बैठक में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया, जिसमें साफ कहा गया है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना पूरी तरह से तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं और उनके कार्यालय का आध्यात्मिक एवं धार्मिक मामला है, जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को कोई भूमिका नहीं मिलनी चाहिए।

मैककॉल ने कहा, “अगर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तो बीजिंग एक नकली दलाई लामा को सामने लाएगा। एक ऐसा आध्यात्मिक नेता जो तिब्बती लोगों के प्रति नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार होगा।”

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि चीन इस नकली नेता का इस्तेमाल पूरे हिमालयी क्षेत्र — खासकर नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा के पास अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए करेगा।

धर्मशाला यात्रा का जिक्र

मैककॉल ने 2024 में भारत के धर्मशाला में दलाई लामा से हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि दलाई लामा बेहद गर्मजोशी, बुद्धिमत्ता और हास्य से भरे हुए व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि दलाई लामा ने उनसे कहा था कि वे 110 साल तक जीने की योजना बना रहे हैं।

हालांकि, मैककॉल ने कहा कि दलाई लामा के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के बावजूद, उत्तराधिकार के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दलाई लामा पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका उत्तराधिकारी “आजादी के माहौल” में चुना जाएगा, न कि चीन में। इस संबंध में दलाई लामा की ओर से कहा गया कि वे चीन में नहीं, बल्कि आजादी के माहौल में पुनर्जन्म लेंगे।

चीन पर आरोप

मैककॉल ने याद दिलाया कि 2007 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने का “अधिकार” दे दिया था। उन्होंने कहा, “एक आधिकारिक तौर पर नास्तिक सरकार तिब्बती लोगों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।”

उन्होंने हाल ही में चीन द्वारा पारित “जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून” का भी जिक्र किया, जिसके जरिए बीजिंग अल्पसंख्यक समुदायों पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर रहा है।

नीति का आधार

यह संशोधन 2020 के द्विदलीय ‘तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम’ पर आधारित है। मैककॉल ने कहा कि उनका प्रस्ताव अमेरिकी नीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगा कि दलाई लामा का उत्तराधिकार तिब्बती लोगों और उनके धर्मगुरुओं का फैसला है, CCP का नहीं।

उन्होंने जोर देकर कहा “यह सिर्फ आस्था का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा है।”

मैककॉल ने अंत में अपील की कि दलाई लामा की इच्छा का सम्मान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उत्तराधिकारी उन्हीं के लोगों द्वारा चुना जाए, न कि उस सरकार द्वारा जिसने दशकों से तिब्बती संस्कृति और पहचान को मिटाने की कोशिश की है।


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