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विदेश मंत्री जयशंकर का ब्रिक्स को संदेश: शांति, कूटनीति और वैश्विक सुधार में अग्रणी भूमिका निभाए

Date : 27-Sep-2025

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करते हुए कहा कि ब्रिक्स को आज के अशांत वैश्विक परिदृश्य में शांति, संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का सशक्त संदेश देना चाहिए।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब बहुपक्षवाद दबाव में है, तब ब्रिक्स तर्क और रचनात्मक बदलाव की मज़बूत आवाज़ के रूप में उभर सकता है। डॉ. जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से आह्वान किया कि वे संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों, विशेषकर सुरक्षा परिषद, में व्यापक और आवश्यक सुधारों के लिए अपने सामूहिक प्रयासों को और तेज़ करें।

व्यापार के क्षेत्र में बढ़ते संरक्षणवाद, टैरिफ अस्थिरता और गैर-टैरिफ बाधाओं की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार, ब्रिक्स सहयोग के अगले चरण को परिभाषित करेंगे। भारत की अध्यक्षता में, डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप, नवाचार, खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

अन्य प्रमुख बैठकें:

IBSA संवाद मंच की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में परिवर्तनकारी सुधार की पुरज़ोर मांग उठाई। इसमें IBSA ट्रस्ट फंड, समुद्री अभ्यास, व्यापार बढ़ाने और अकादमिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

उन्होंने भारत-लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों के समुदाय (CELAC) की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की। दोनों पक्षों ने कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, एचएडीआर, क्षमता निर्माण और AI, अंतरिक्ष, खनिज व नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत और CELAC, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मज़बूत करने और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की तत्काल आवश्यकता को लेकर एकमत हैं।

द्विपक्षीय बैठकें:

डॉ. जयशंकर ने इस अवसर पर कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी कीं, जिनमें शामिल हैं:

  • UAE – शेख अब्दुल्ला बिन जायद

  • रूस – सर्गेई लावरोव

  • इंडोनेशिया, ऑस्ट्रिया, क्यूबा, रोमानिया और सिएरा लियोन के प्रतिनिधि

यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता, वैश्विक शासन सुधारों की पैरवी और विकासशील देशों के सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम रहा।


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