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आरएसएस ने सौ वर्ष की अखंड यात्रा में यश और कीर्ति की गाथा लिखी: प्रांत प्रचार प्रमुख

Date : 29-Sep-2025

जन उत्सव के रूप में मनाया जा रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष समारोह

देहरादून, 29 सितंबर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ विजयदशमी और नवरात्र के अवसर पर देहरादून के दो महानगरों में आयोजित किया गया। महानगर दक्षिण में 23 स्थानों और उत्तर में 18 स्थानों पर पूर्ण गणेश में स्वयंसेवकों ने योग, व्यायाम और अनुशासन का अनुकरणीय प्रदर्शन किया। समाज के सभी वर्गों—माताओं-बहनों, युवाओं और नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी ने कार्यक्रमों को जन-उत्सव का रूप प्रदान किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय ने कहा कि वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना हुई थी। विजयदशमी केवल भगवान श्रीराम के रावण के पराभव का स्मरण मात्र नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार कि दूरदृष्टि से संघ निरंतर गंगा के प्रवाह के समान आगे बढ़ रहा है। डाॅ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता आंदोलन में लड़ते हुए अनुभव किया कि सामान्य हिंदू समाज अपना आत्म स्वाभिमान अपने पूर्वजों की साहस शौर्य और महानता की परंपरा से दूर होकर जातियों, भाषा, क्षेत्र उच्च नीच के भाव में भटकर बहुत कमजोर हो रहा है, इसलिए इस राष्ट्र को अगर नई ऊंचाइयां और हिंदुत्व की संगठन शक्ति के साथ खड़ा नहीं किया गया, तो आक्रमणों से भारत को कमजोर करने की शक्तियां सक्रिय हो जाएगी और हिंदुत्व का सूर्य बुझाने के प्रयास किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की अखंड यात्रा में एक यश और कीर्ति की महान गाथा लिखी है।

उन्होंने कहा कि विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजन और शक्ति पूजन की परंपरा यह संदेश देती है कि संगठित समाज ही अधर्म, अन्याय और अराजकता फैलाने वाली शक्तियों पर विजय प्राप्त कर सकती है। नवरात्र में मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे अहंकारी असुरों का संहार किया। दुर्गा का राक्षसों के संहार की कथा व शक्ति की उपासना विश्वास दिलाती है कि संगठन और आत्मशक्ति से किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।

प्रांत प्रचार प्रमुख ने संघ की स्थापना, हिंदू समाज की संगठन शक्ति, सेवा भावना, राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने समाज को धर्मांतरण और विघटनकारी षड्यंत्रों से सतर्क रहने का आह्वान करते हुए कहा कि उपेक्षित और गरीब वर्गों की सेवा ही सच्चे राष्ट्रधर्म का पालन है।

इस अवसर पर उत्तराखंड के पराक्रमी सपूत जसवंत सिंह रावत के चीन युद्ध में बलिदान का स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता है, साथ ही बलिदानी क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह की जयंती का उल्लेख कर प्रेरक उदाहरण भी दिए। शताब्दी वर्ष के इस आरंभिक आयोजन में स्वयंसेवकों का जोश और समाज की व्यापक भागीदारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंदू समाज अपनी परंपरा, संस्कृति और संगठन शक्ति के बल पर भारत को सशक्त और विश्वगुरु बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

शताब्दी वर्ष समारोह में विभाग प्रचारक धनंजय, राजेंद्र पंत, अरुण, गजेंद्र, देवराज, सतेंदर आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश के साथ शामिल हुए।


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