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कर्नाटक में लोकायुक्त ने कांग्रेस विधायक राजेगौड़ा के घर की ली तलाशी

Date : 30-Sep-2025

चिक्कामगलुरु, 30 सितंबर। लोकायुक्त पुलिस आय से अधिक संपत्ति के मामले में कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के घर पर छापेमारी की है। यह जांच कोप्पा निवासी दिनेश होसुर की ओर से दायर एक निजी शिकायत के बाद शुरू की गई है, जिसके आधार पर जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष न्यायालय ने जांच के आदेश दिए थे।

लोकायुक्त पुलिस ने आदालत के आदेश पर पिछले हफ़्ते विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के खिलाफ प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज की थी, जिसके आधार पर आज उनके ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। लोकायुक्त के अधिकारी उनके आवास और फ़ार्म हाउस समेत चार जगहों पर तलाशी ले रहे हैं। अधिकारी खांड्या होबली के बासापुरा गांव में राजेगौड़ा के आवास पर भी तलाशी लेने और ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करने पहुंचे।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्नेहा ने यह पुष्टि की है कि कांग्रेस विधायक राजेगौड़ा के परिवार के खिलाफ दर्ज मामले के सिलसिले में तलाशी ली जा रही है।

दरअसल, यह जांच कोप्पा निवासी दिनेश होसुर की ओर से दायर एक निजी शिकायत के बाद शुरू की गई है, जिसके आधार पर जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने जांच के आदेश दिए थे। आदालत के आदेश पर लोकायुक्त पुलिस ने 23 सितंबर को राजेगौड़ा, उनकी पत्नी डीके पुष्पा और बेटे राजदेव टीआर के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की थी।

दिनेश होसुर ने अदालत में दी गयी अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि टीडी राजेगौड़ा ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और सरकार तथा आयकर विभाग के साथ धोखाधड़ी की है। उनके खिलाफ गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा था कि राजेगौड़ा के परिवार के सदस्यों ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। उनकी साझेदारी फर्म, मेसर्स शबाना रमज़ान के लेन-देन सबूत के तौर पर मौजूद हैं। यह भी आरोप लगाया गया था कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को 55.75 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा को 66 करोड़ रुपये और कर्नाटक बैंक को 81.95 लाख रुपये चुकाए गए हैं। हालांकि, लोकायुक्त को सौंपे गए हलफनामे में, राजेगौड़ा ने केवल 40 लाख रुपये की वार्षिक आय घोषित की है।

शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग को सौंपी गई जानकारी में संपत्ति की पूरी घोषणा न करने के संबंध में जनप्रतिनिधि न्यायालय में याचिका दायर की थी। जनप्रतिनिधि न्यायालय के निर्देश पर लोकायुक्त कार्यालय में मामला दर्ज किया गया। अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को 16 सितंबर को आदेश जारी कर प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया था।


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