भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता, जो इस महीने की पहली तारीख से लागू हुआ, भारत की विदेश व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह समझौता स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन जैसे चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है, जिससे यह देश की सबसे दूरदर्शी आर्थिक साझेदारियों में गिना जा रहा है। यह समझौता बाजार पहुंच को व्यापक बनाता है, विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देता है तथा प्रौद्योगिकी और स्थिरता के क्षेत्र में सहयोग को मजबूती प्रदान करता है।
EFTA की ओर से 92 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी गई हैं, जो भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को कवर करती हैं, जिनमें गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद शामिल हैं। वहीं, भारत ने 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर पहुंच बढ़ाई है, जो EFTA के 95 प्रतिशत से अधिक निर्यात को प्रभावित करता है।
यह समझौता केवल एक व्यापार समझौता नहीं बल्कि निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का व्यापक मंच है, जो दोनों पक्षों के बीच स्थायी आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को सुनिश्चित करेगा।
