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वार्ष‍िकी : प्रधानमंत्री मोदी ने की मप्र की माहेश्वरी साड़ी के प्रचार की वैश्विक पहल

Date : 29-Dec-2025

भोपाल, 29 दिसंबर । मध्य प्रदेश की पहचान बन चुकी माहेश्वरी साड़ी के लिए वर्ष 2025 एक ऐतिहासिक और निर्णायक वर्ष बनकर उभरा है। 200 वर्षों से भी अधिक पुरानी इस स्वदेशी हथकरघा परंपरा को राष्ट्रीय से आगे वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल निर्णायक साबित हुई है। देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर शुरू हुई योजनाओं और घोषणाओं ने माहेश्वरी साड़ी को एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अहिल्याबाई होलकर की विरासत से जुड़ा 2025

माहेश्वरी साड़ी की कहानी सीधे-सीधे मालवा की महान शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़ी है। उन्होंने 18वीं शताब्दी में वर्तमान खरगोन जिले के महेश्वर में कारीगरों के साथ मिलकर इस साड़ी को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया। उनके शासनकाल में माहेश्वरी साड़ी शाही दरबारों में बहुमूल्य उपहार मानी जाती थी और ब्रिटिश काल में यह यूरोपीय घरों तक पहुंची। वर्ष 2025 में जब देश अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती मना रहा था, उसी समय माहेश्वरी साड़ी को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़ने की ऐतिहासिक शुरुआत हुई। यह संयोग परंपरा और विकास के संगम का प्रतीक माना जा रहा है।

दरअसल, 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि रही धार जिले में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क की आधारशिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि यह परियोजना महेश्वरी वस्त्र उद्योग और देवी अहिल्याबाई होलकर की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाएगी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन बोले कि “माहेश्वरी वस्त्र मध्य प्रदेश की गौरवशाली परंपरा रहे हैं और अब पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से इस परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई उड़ान मिलेगी।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जीआई टैग प्राप्त माहेश्वरी साड़ी कभी शाही दरबारों और ब्रिटिश घरों की शान रही है और आज भी भारतीय वस्त्र क्षेत्र को प्रेरणा देती है।

एक ही स्थान पर पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला

पीएम मित्रा पार्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, इस पार्क से कपास और रेशम जैसी बुनियादी सामग्री तक आसान पहुंच, गुणवत्ता जांच और प्रमाणीकरण की सरल व्यवस्था, कताई, डिजाइनिंग, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सुविधा, सीधे निर्यात की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री ने कहा भी कि “यहां कताई, डिजाइनिंग और प्रसंस्करण का काम होगा। निर्यात भी यहीं से होगा। धार विश्व बाजार में अपनी चमक बिखेरेगा।” यह घोषणा महेश्वर और आसपास के बुनकरों के लिए आर्थिक सुरक्षा और नए अवसरों का संकेत है।

5एफ विजन से वैश्विक बाजार तक

प्रधानमंत्री मोदी ने वस्त्र उद्योग के लिए अपनी सरकार के 5एफ विजन को भी दोहराया है, खेत से रेशा, रेशा से कारखाना, कारखाना से फैशन और फैशन से विदेश। यह विजन माहेश्वरी साड़ी जैसी पारंपरिक कला को स्थानीय पहचान से निकालकर वैश्विक ब्रांड बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके साथ ही इसी साल देखने में आया कि माहेश्वरी साड़ी को परंपरागत परिधान से आगे आधुनिक फैशन के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फैशन प्रदर्शनियों, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, और डिजाइन संस्थानों के सहयोग से इसे युवाओं और वैश्विक खरीदारों के बीच लोकप्रिय बनाया गया। ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे बुनकरों से ग्राहकों तक पहुंच बढ़ी, जिससे बिचौलियों की भूमिका घटी और कारीगरों की आय में सुधार हुआ।

बुनकरों के लिए 2025 बना वरदान

आज महेश्वर क्षेत्र में हजारों हथकरघे सक्रिय हैं और हजारों परिवारों की आजीविका माहेश्वरी साड़ी पर निर्भर है। 2025 में मिली सरकारी मान्यता, औद्योगिक निवेश और वैश्विक प्रचार ने बुनकरों में नई उम्मीद जगाई है। रोजगार के नए अवसर, महिलाओं की भागीदारी और निर्यात संभावनाओं ने इस उद्योग को फिर से मजबूत आधार दिया है।

इस तरह देख सकते हैं कि ये वर्ष 2025 राज्‍य के लिए उसकी इस परम्‍परागत कला और वस्‍त्र उद्योग की धरोहर माहेश्वरी साड़ियों के लिए वरदान साबित हुआ है। अहिल्याबाई होलकर की ऐतिहासिक विरासत, प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक सोच और प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क यानी कि पीएम मित्रा पार्क जैसी योजनाओं ने इस पारंपरिक साड़ी को भविष्य का उद्योग बना दिया है। यह वर्ष माहेश्वरी साड़ी के पुनर्जागरण का साक्षी बनने के साथ ही भारतीय हथकरघा परंपरा के वैश्विक विस्तार की मजबूत नींव भी रखता हुआ यहां दिखाई दिया है।


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