सरकार से शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, डिजिटल संप्रभुता पर ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

National

सरकार से शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, डिजिटल संप्रभुता पर ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग

Date : 25-Mar-2026

नई दिल्ली, 25 मार्च । राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण संबंधी जानकारी और डिजिटल संप्रभुता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सदस्यों ने सरकार से इन मुद्दों पर ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

भारतीय जनता पार्टी के सदस्य डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली में अंकों की होड़ के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। परिवार, स्कूल और समाज के दबाव के चलते बच्चे अत्यधिक तनाव में हैं और कोचिंग पर निर्भर हो रहे हैं। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि देश में बड़ी संख्या में बच्चे तनाव, चिंता, भावनात्मक असंतुलन और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

उन्होंने विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव पर चिंता जताते हुए प्रत्येक 100 छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सक की नियुक्ति की मांग की। साथ ही शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

कांग्रेस सदस्य रंजीता रंजन ने देश में बढ़ते स्वास्थ्य संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में मधुमेह और मोटापे के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट और सरल पोषण संबंधी जानकारी के अभाव को गंभीर समस्या बताते हुए उन्होंने पैकेट के सामने रंग-आधारित चेतावनी प्रणाली लागू करने की मांग की। इससे खाद्य कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव होगा।

कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने डिजिटल संप्रभुता का मुद्दा उठाते हुए भारत में स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चीन, रूस, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, चेक रिपब्लिक और वियतनाम समेत कई देशों का अपना स्वदेशी सर्च इंजन है। इन देशों ने स्वदेशी सर्च इंजन को विकसित कर अपनी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत में स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि हमारे 140 करोड़ लोगों का अधिकांश डेटा विदेशी सर्च इंजन के माध्यम से संग्रहित और विश्लेषित होता है। ये गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement