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दिल्ली में 16वें भारत प्रोबायोटिक संगोष्ठी का समापन

Date : 28-Mar-2026

 नई दिल्ली, 28 मार्च। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जेएलएन सभागार में आयोजित दो दिवसीय 16वें भारत प्रोबायोटिक संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया।

गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय "आंत माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक्स: जन्म से लेकर शतायु व्यक्तियों तक प्रभाव" रहा। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल में आंत (गट) के सूक्ष्मजीवों की निर्णायक भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने देश में खान-पान की आदतों में आ रहे तीव्र बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विज्ञापनों के कारण अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ी है, जो पारंपरिक पोषक आहार को पीछे छोड़ रही है। देश में बीमारियों का लगभग 56.4 प्रतिशत भार अस्वास्थ्यकर और असंतुलित आहार के कारण है। यदि इन प्रवृत्तियों को नहीं रोका गया तो इसके सूक्ष्मजैविक परिणाम भविष्य में बेहद गंभीर हो सकते हैं।

स्वास्थ्य को आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए गौबा ने कहा कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तभी सफल होगा जब कार्यबल स्वस्थ हो। आयुष्मान भारत और पीएम-जेएवाई जैसी योजनाओं से स्वास्थ्य पर होने वाला निजी खर्च 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत पर आ गया है जिससे आम परिवारों को 1.25 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने वंचित समुदायों तक विशेषज्ञ देखभाल पहुंचाने के लिए एआई डेटा एनालिटिक्स और टेलीमेडिसिन के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

माइक्रोबायोम विज्ञान के भविष्य पर चर्चा करते हुए गौबा ने सीआरआईएसपीआर-सक्षम इंजीनियरिंग और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों का उल्लेख किया जो सटीक चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों और चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे प्रोबायोटिक बाजार में फैली गलत सूचनाओं के खिलाफ अपनी विश्वसनीयता का उपयोग कर सही जानकारी प्रसारित करें। पारंपरिक भारतीय पदार्थों की समृद्ध विरासत को आधुनिक जीनोमिक अनुसंधान के साथ जोड़कर वैश्विक नेतृत्व करें। सुरक्षित और प्रभावी उत्पाद विकसित करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और नियामकों के बीच मजबूत तालमेल बिठाएं।

गौबा ने युवा शोधकर्ताओं के नवाचारों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह मंच माइक्रोबायोम विज्ञान के क्षेत्र में भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।


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