बांकुड़ा, 08 अप्रैल । बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र से एसयूसीआई की उम्मीदवार लीना घोष का राजनीतिक सफर संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में लीना घोष ने अपने जीवन और राजनीतिक सफर को लेकर कई रोचक खुलासे किये। ग्यारहवीं कक्षा में छात्र राजनीति पर शिक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में अकेली ‘हां’ कहने वाली लीना ने वहीं से राजनीतिक पथ पर कदम रखा।
लीना का जन्म धनबाद में हुआ, लेकिन बचपन में ही वे अपनी मां के साथ बांकुड़ा जिले के जयपुर थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव चली आईं। प्रारंभिक शिक्षा वहीं के विद्यालय से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए वे बांकुरा जिले के सारदामणि महिला महाविद्यालय में दाखिला लिया। छात्र जीवन में ही उन्होंने एसयूसीआई के छात्र संगठन डीएसओ के माध्यम से कॉलेज छात्र संघ चुनावों में भाग लिया, हालांकि तीन वर्षों तक जीत नहीं मिली।
लीना के माता-पिता भी लंबे समय से एसयूसीआई से जुड़े रहे हैं। उनके प्रभाव से लीना ने भी पार्टी से जुड़ाव बनाए रखा। शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी वे श्रमिक आंदोलनों में सक्रिय रही हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल आशाकर्मी संघ की जिला सभानेत्री के पद पर कार्यरत हैं।
लीना घोष ने बताया कि उनका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और मूल्य वृद्धि जैसे आम जन समस्याओं पर लोगों के लिए लगातार संघर्ष करना है। उन्होंने कहा, “हम सारा वर्ष आंदोलन के रास्ते पर रहते हैं। हमारी पहल से प्राइमरी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा लागू हुई और अभी तक इस राज्य में स्मार्ट मीटर पूरी तरह नहीं लगाया जा सका।”
वह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से जनता से जुड़ी हैं और इस बार भी बांकुड़ा विधानसभा सीट पर चुनावी अभियान में जनता के लिए खड़ी हैं। उनके सामने भाजपा के नीलाद्रि शेखर दाना और तृणमूल की शम्पा दरीपा मुकाबले में हैं।
बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र जो बांकुड़ा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसमें बांकुड़ा नगरपालिका तथा बांकुड़ा-एक ब्लॉक शामिल हैं। इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। 1977 से 2006 तक यह क्षेत्र वामपंथियों का मजबूत गढ़ था, जिसमें पार्थ दे लंबे समय तक विधायक और राज्य के मंत्री रहे। 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र में पकड़ बनाते हुए काशीनाथ मिश्रा को विजयी बनाया, जबकि 2016 में शम्पा दरिपा (तृणमूल समर्थित कांग्रेस) ने जीत दर्ज की। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नीलाद्री शेखर दाना ने यहां से विधायक के रूप में जीत हासिल की। इस क्षेत्र में हमेशा से कांग्रेस और वामपंथियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही है, लेकिन हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की बढ़त देखने को मिली है। 2021 के चुनाव परिणामों के अनुसार नीलाद्री शेखर दाना ने 95,466 वोट प्राप्त किए, जबकि तृणमूल कांग्रेस की सयांतीका बनर्जी को 93,998 और कांग्रेस की राधारानी बनर्जी को 13,764 वोट मिले थे।
