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दिलीप घोष पर फिरहाद का तंज, ‘तृणमूल में आने की बात कही थी’

Date : 14-Apr-2026

 खड़गपुर, 14 अप्रैल। फिरहाद हाकिम सोमवार के शाम खड़गपुर के इंदा ईदगाह मैदान में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप सरकार के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। सभा में उन्होंने भाजपा नेता दिलीप घोष पर खड़ा निशाना साधते हुए दावा किया कि दिलीप घोष एक समय तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे।

फिरहाद हाकिम ने कहा कि जो व्यक्ति आज यहां उम्मीदवार बने हैं, वे पहले इसी क्षेत्र के सांसद थे, लेकिन अचानक उन्हें यहां से हटाकर दुर्गापुर भेज दिया गया, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद निराश होकर दिलीप घोष ने कहा था कि अब भाजपा में रहना संभव नहीं है और यदि तृणमूल जगह दे तो वे उसमें शामिल होंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और हाथ मिलाने के बाद उनका रुख बदल गया और उन्हें फिर से टिकट मिल गया।

फिरहाद हाकिम ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उन्हें देशद्रोही बताना गलत है। उनके अनुसार देशद्रोही वे लोग हैं जो संविधान का सम्मान नहीं करते और 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के मतदान के अधिकार को छीनने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसी मतदाता सूची के आधार पर 2024 का चुनाव हुआ था तो अब उस पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सभी लोग सम्मान देते थे, लेकिन मोदी की भाषा फिल्म शोले के खलनायक गब्बर सिंह जैसी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा तृणमूल को चार्जशीट दे रही है, जबकि चार्जशीट देने का अधिकार पुलिस और जांच एजेंसियों का होता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि कभी सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा दूसरों को चार्जशीट देने की बात करती है, लेकिन अपने नेताओं के मामलों का क्या हुआ।

फिरहाद हाकिम ने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में बांग्ला भाषा बोलने वाले प्रवासी श्रमिकों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग भारतीय बंगाली हैं, न कि बांग्लादेशी।

राज्य सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जंगमहल क्षेत्र में कभी आदिवासी लोगों को पेट भरने के लिए चींटियों के अंडे और जंगल की लतापत्तियां खानी पड़ती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विकास योजनाओं के कारण आज उनकी स्थिति में सुधार हुआ है और वे सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी के विकास के लिए काम कर रही हैं।

वहीं इस बयान पर पलटवार करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल की स्थिति आज एक बेकार पड़े सिक्के जैसी हो गई है। उन्होंने तृणमूल को “डस्टबिन” बताते हुए कहा कि पार्टी इतनी गंदी हो चुकी है कि उससे मछली बाजार जैसी बदबू आती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए लोगों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है।


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