लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से लाया गया संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक निचले सदन में पारित नहीं हो सका। लोकसभा में उपस्थित कुल 528 सदस्यों में से विधेयक को दो तिहाई बहुमत यानी 352 सदस्यों का समर्थन नहीं मिल पाया।
विधेयक पर मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान के परिणाम घोषित करते हुए कहा कि इस विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं होने के कारण इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।
इसके बाद, एनडीए गठबंधन की महिला सांसदों ने विपक्षी दलों के खिलाफ संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
इसके बाद, संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का अवसर गंवाने का आरोप लगाया।
विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के फैसलों में वे हमेशा पीछे हटते रहे हैं। गृह मंत्री ने विधेयक की विफलता का जश्न मनाने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना भी की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में श्री शाह ने कहा, "विपक्ष का यह जश्न दशकों से अपने अधिकारों का इंतजार कर रही हर महिला का अपमान है।"
इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है।
बाद में सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और आज सुबह 11 बजे फिर से बैठक होगी।
