खूंटी, 20 अप्रैल । महर्षि मेंही आश्रम शांतिपुरी शबरी कुटिया, मुरहू में सोमवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष सत्संग और भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ईश-स्तुति, गुरु वंदना, ध्यानाभ्यास और रामचरितमानस के पाठ के साथ हुई।
सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी लक्ष्मण जी महाराज ने कहा कि अक्षय तृतीया अत्यंत पवित्र और सर्वोत्तम पर्व है। इस दिन भगवान का भजन, सत्संग, ध्यान और दान करने से प्राप्त पुण्य अक्षय रहता है और उसका क्षय कभी नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस दिन किए गए पुण्य से मनुष्य को जीवन में सुख और आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं और सतयुग और त्रेता युग की शुरुआत भी इसी तिथि से मानी जाती है।
स्वामी जी ने कहा कि ध्यान करने से पापों का नाश होता है और सत्संग से मन को शांति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान करना सर्वोत्तम बताया गया है, क्योंकि पीपल हमेशा ऑक्सीजन देता है और इसके फल-पत्ते पशु-पक्षियों के लिए भी उपयोगी होते हैं।
मुरली ब्रह्मचारी ने कहा कि भगवान सभी जीवों में विराजमान हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करनी चाहिए। वहीं डॉ डीएन तिवारी ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था और इसी दिन गंगा का अवतरण भी हुआ था।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के बीच भंडारे का वितरण किया गया।
मौके पर रामहरि साव, हरिद्वार ठाकुर, गणपति ठाकुर, जगन पुर्ति, रामसहाय मुंडा, उमेश ठाकुर, राम सिंह मुंडा, संदीप मुंडा, फगुआ मुंडा, सनिका मुंडा, सनातन कुमार बीरु सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
