भुवनेश्वर, 20 अप्रैल। अक्षय तृतीया के अवसर पर आज ओडिशा भर में उत्साह और श्रद्धा के साथ पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन राज्य में कृषि सत्र की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसानों ने पारंपरिक अखी मुठी अनुकुला अनुष्ठान संपन्न किया, जिसके तहत खेतों की जुताई के बाद प्रतीकात्मक रूप से बीज बोए जाते हैं। यह परंपरा नए कृषि वर्ष के आरंभ का संकेत देती है। नए वस्त्र धारण कर किसान बीजों से भरी टोकरी लेकर खेतों में पहुंचे और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की।
यह पर्व चंदन यात्रा की शुरुआत के साथ भी जुड़ा हुआ है, जिसके तहत राज्य के विभिन्न मंदिरों में देवताओं की शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। पुरी में इसी दिन से वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियां भी प्रारंभ हो जाती हैं, जिसमें भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के लिए रथों का निर्माण शुरू किया जाता है।
अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन विवाह, संपत्ति खरीदने तथा नए व्यवसाय शुरू करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन आरंभ किए गए कार्य निरंतर सफलता और समृद्धि प्रदान करते हैं।
धार्मिक दृष्टि से भी यह दिन विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यह भगवान परशुराम की जयंती का दिन है।
