‘नो वोट टू टीएमसी’ नारे का चुनाव में दिखा असर, भाजपा को मिली जीत | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

National

‘नो वोट टू टीएमसी’ नारे का चुनाव में दिखा असर, भाजपा को मिली जीत

Date : 07-May-2026

 कोलकाता, 07 मई । जंगलमहल में इस बार भाजपा की बड़ी जीत के पीछे कूड़मी समाज की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर के कई इलाकों में प्रभाव रखने वाले कूड़मी समुदाय ने चुनाव से पहले खुलकर ‘नो वोट टू टीएमसी’ का नारा दिया था। विधानसभा चुनाव में झाड़ग्राम जिले की चारों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद भाजपा नेताओं ने कूड़मी समाज के समर्थन को अहम कारण बताया है।

बुधवार देर शाम पार्टी कार्यकर्ताओं के जीत के खुशी में शामिल हुए भाजपा नेता देवाशीष कुंडू ने कहा कि जंगलमहल के हर वर्ग के लोगों ने भाजपा को समर्थन दिया है और कूड़मी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा। वहीं तृणमूल के पराजित उम्मीदवार अजीत महतो ने आरोप लगाया कि कुछ कूड़मी नेताओं ने भाजपा के साथ मिलकर काम किया और ईवीएम में गड़बड़ी के कारण भाजपा को फायदा मिला। भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

कूड़मी समाज लंबे समय से अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन करता रहा है। रेल और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम से लेकर बड़े आंदोलन किए गए। 2023 पंचायत चुनाव से पहले गढ़ शालबनी में अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हमले के आरोप में कूड़मी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल और कूड़मी समाज के रिश्तों में दूरी बढ़ी थी। पंचायत चुनाव में कई जगह निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भी इस बदलाव का संकेत दिया था।

इस चुनाव में ‘आदिवासी कूड़मी समाज’, ‘कूड़मी समाज पश्चिम बंगाल’ और ‘आदिवासी नेगाचारी कूड़मी समाज’ के कई नेताओं को भाजपा के पक्ष में सक्रिय देखा गया। ‘कूड़मी समाज पश्चिम बंगाल’ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश महतो भाजपा में शामिल होकर गोपीबल्लभपुर सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे। इलाके में कूड़मी वोटरों की संख्या करीब 40 प्रतिशत मानी जाती है।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement