बलरामपुर, 07 मई। अप्रैल माह की भीषण गर्मी में बलरामपुर जिले के रामानुजगंज की जीवनदायिनी कन्हर नदी पूरी तरह सूख चुकी थी। नदी में पानी खत्म होने से करीब 25 हजार की आबादी पर पेयजल संकट मंडराने लगा था। इसी बीच मई के शुरुआती सप्ताह में मौसम ने करवट ली और लगातार दो-तीन दिनों तक हुई रुक-रुककर बारिश से कन्हर नदी एक बार फिर लबालब हो गई। नदी में पानी लौटने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक टिकती नजर नहीं आ रही है।
दरअसल, कन्हर नदी के सभी आठों गेट खराब हो चुके हैं, जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। स्थिति यह है कि नदी में जितना पानी भरा हुआ है, उतनी ही तेजी से वह लीकेज के जरिए बाहर भी निकल रहा है। यदि समय रहते गेटों को दुरुस्त कर पानी का ठहराव नहीं किया गया, तो एक से दो सप्ताह के भीतर नदी दोबारा सूख सकती है। ऐसे में रामानुजगंज सहित झारखंड के सीमावर्ती गोदरमाना क्षेत्र में भी पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
गौरतलब है कि इस गंभीर समस्या को लेकर ऑफबीट ने पहले ही जल संसाधन विभाग को अलर्ट किया था। विभाग के एसडीओ आशीष जगत ने उस समय बताया था कि इंडम को पत्र लिखकर अंबिकापुर से तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की जा रही है, ताकि गेटों की मरम्मत कराई जा सके। हालांकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि आठों गेट पूरी तरह खराब हो चुके हैं और उनकी मरम्मत संभव नहीं है। अब सभी गेट नए लगाए जाएंगे।
इस मामले में जल संसाधन विभाग के ईई एनपी डहरिया ने बताया कि, नए गेट लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टेंडर लग चुका है, लेकिन अभी खुला नहीं है। प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू कराया जाएगा।
हालांकि सबसे बड़ी चिंता यही है कि, सरकारी प्रक्रिया में समय लगना तय है, जबकि कन्हर का पानी तेजी से रिस रहा है। यदि जल्द अस्थायी व्यवस्था कर पानी को नहीं रोका गया, तो बारिश से मिली राहत कुछ ही दिनों में खत्म हो सकती है। नदी सूखने की स्थिति में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो जाएगा।
