नई दिल्ली, 17 मई। देशव्यापी जनगणना 2027 की दिशा के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का फील्ड कार्य पांच प्रमुख राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू हो गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार इसमें दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र, राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र और झारखंड शामिल हैं। दूसरी ओर, डिजिटल जनगणना के तहत शुरू की गई स्व-गणना सुविधा को जनता की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही हैं और अब तक 25 राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार अपनी स्व-गणना पूरी कर चुके हैं।
आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव मे घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। आज से गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में भी स्व-गणना की सुविधा शुरू हो गई है। इन क्षेत्रों के निवासी 31 मई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। इसके बाद, यहां 1 जून से 30 जून 2026 तक फील्ड कार्य चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी स्व-गणना की प्रक्रिया चालू है जो 21 मई तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक जमीनी स्तर पर मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा।
इससे पहले, 16 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम के साथ-साथ दिल्ली के एनडीएमसी (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) तथा दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्रों में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इतिहास में पहली बार यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों और मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग से की जा रही है। इस चरण में प्रगणक एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान एक अधिसूचित प्रश्नावली के माध्यम से कुल 33 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से परिवार की आवासीय स्थिति, परिवार का विवरण, घर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं और संपत्तियों से संबंधित जानकारी शामिल है। यह डेटा देश के विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। जिन परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम से स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें एक विशिष्ट 'स्व-गणना आईडी' प्राप्त हुई है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे इसे सुरक्षित रखें और जब गणनाकर्ता, उनके घर आएं, तो यह आईडी उनके साथ साझा करें।
जिन परिवारों ने किसी कारणवश स्व-गणना नहीं की है उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। गणनाकर्ता स्वयं घर-घर जाकर उनका विवरण दर्ज करेंगे।
जनगणना अधिनियम, 1948 के कड़े प्रावधानों के तहत नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी। इसका उपयोग किसी अन्य काम के लिए नहीं बल्कि केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास योजनाओं को तैयार करने के लिए किया जाएगा। सरकार ने सभी देशवासियों से इस राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग देने की अपील की है।
