इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की मान्यता देने के लिए पश्चिमी देशों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दो-राज्य समाधान की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि यह इज़रायल के लिए "आत्मघाती" कदम होगा।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने फ़्रांस, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई पश्चिमी देशों को “नासमझ” कहा, जो फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के पक्ष में हैं। उन्होंने इस सप्ताह हुए महासभा शिखर सम्मेलन की भी आलोचना की, जिसमें इज़रायल और फिलिस्तीन के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात दोहराई गई थी।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक गाजा स्थित आतंकवादी संगठन हमास हथियार नहीं डालता और 2023 के आतंकवादी हमले में बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा नहीं कर देता, तब तक इज़रायल गाजा में अपने अभियान को समाप्त नहीं करेगा। उन्होंने उस हमले की याद दिलाई जिसमें 1,200 से अधिक लोग मारे गए थे।
नेतन्याहू के भाषण से पहले कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए महासभा हॉल से वॉकआउट किया, हालांकि कुछ देशों के प्रतिनिधि वहीं रुके और भाषण के दौरान उनका समर्थन किया।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा कि गाजा युद्ध समाप्त करने को लेकर वार्ताकार एक समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए वह सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर समान राय जाहिर की। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका गाजा युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते के करीब है और उन्हें विश्वास है कि यह समझौता बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करेगा।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजा संकट पर राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
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सभी बंधकों की रिहाई,
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एक स्थायी युद्धविराम,
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गाजा से इजरायली बलों की चरणबद्ध वापसी,
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हमास की भागीदारी के बिना एक वैकल्पिक शासन व्यवस्था,
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और गाजा में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय बलों की तैनाती।
राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे इज़रायल को कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक पर पूरी तरह कब्जा करने की इजाजत नहीं देंगे।
