ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की तीव्र निंदा की है। यह निंदा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के इतर आयोजित उनकी वार्षिक बैठक के दौरान की गई। इस बैठक की अध्यक्षता भारत ने की, जो वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स का भावी अध्यक्ष होगा।
संयुक्त मीडिया वक्तव्य में मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य, चाहे उसकी मंशा कुछ भी हो, कब, कहां या किसके द्वारा किया गया हो — वह आपराधिक और अनुचित है। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद, वित्तीय समर्थन और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित पनाहगाहों जैसे सभी पहलुओं का विरोध करते हुए आतंकवाद के हर रूप का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मंत्रियों ने इस बात पर भी बल दिया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीयता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह मांग की कि आतंकवादी गतिविधियों और उनके समर्थकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत न्याय के कठघरे में लाया जाए।
ब्रिक्स मंत्रियों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की आवश्यकता पर जोर देते हुए आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को पूरी तरह से अस्वीकार करने की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्र अंतिम रूप देने और उसे लागू करने का आह्वान किया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध सभी आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की।
बैठक में वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जहां मंत्रियों ने व्यापार-प्रतिबंधात्मक उपायों की बढ़ती प्रवृत्ति, जैसे कि टैरिफ और गैर-टैरिफ अवरोधों में अंधाधुंध वृद्धि और संरक्षणवाद को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ऐसे एकतरफा कदमों को वैश्विक व्यापार के लिए हानिकारक बताया, जो विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विपरीत हैं और वैश्विक दक्षिण को और अधिक हाशिए पर डालने का जोखिम पैदा करते हैं।
