सावरकर की आलोचना करने वालों के कौन से पुरखे फांसी चढे थे- सुनील आंबेकर | The Voice TV

Quote :

"मेहनत का कोई विकल्प नहीं, बस मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ते रहो।"

National

सावरकर की आलोचना करने वालों के कौन से पुरखे फांसी चढे थे- सुनील आंबेकर

Date : 13-Jun-2023

 नागपुर, 13 जून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने आज एक सीधा सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा- ‘देश में कुछ लोग स्वातंत्र्यवीर सावरकर की तीखी आलोचना करते हैं, मैं इन आलोचकों से पूछना चाहता हूं कि आपके कौन से पूर्वज फांसी पर चढ़े थे?’ नागपुर के चिटणवीस सेंटर मे आयोजित देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुनील आंबेकर ने कहा सेल्युलर जेल में यातनाएं सहन करने वाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर कहते थे कि किसी व्यक्ति के संस्मरण, संस्कार, स्मृतियां कैसी हैं उस पर तय होता है कि, आप कठिन समय का सामना कितने धैर्य से कर सकते हो। सावरकर के यह विचार पत्रकारिता जगत में काम करने वालों के लिए बेहद उपयुक्त है।



वर्तमान दौर की पत्रकारिता का विश्लेषण करते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि समाज में 5 से 10 फीसदी लोग ही अपने विचारों और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। मानव कल्याण के सकारात्मक मार्ग पर चलते हुए इन्हें परिणामों कि चिंता नही होती। वहीं 5 से 10 फीसदी लोग अपनी नकारात्मकता पर अडे रहते हैं। ऐसे लोगो को नकारात्मक चीजे ही प्रभावित करती हैं। शेष बचे 80 फीसदी लोग माहौल को देख कर काम करते है। अपने मतलब के लिए ऐसे लोगो को यू-टर्न लेने में जरा भी देर नही लगती।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सकारात्मक चीजों के लिए अपने विचार और सिद्धांतों पर अडिग रहने वालों को पुरस्कार के माध्यम से प्रेरणा मिलती है। वहीं समाज के 80 फीसदी लोगों को किस ओर जाना चाहिए, उसका मार्गदर्शन प्राप्त होता है। अपनी बातों को विस्तार देते हुए आंबेकर ने कहा कि, मौजूदा समय में मीडिया और सोशल मीडिया सूचना के महासागर की तरह है। इस महासागर में हम अपनी नाव कैसे चलाते हैं उस पर बहुत सी बातें निर्भर होती है। आंबेकर ने आह्वान किया कि, यदि हम अच्छा मीडिया चाहते हैं तो हमें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से पेश आना होगा।



इस अवसर पर इलेक्ट्रानिक मीडिया की वरिष्ठ एंकर रूबिका लियाकत ने कहा कि, देश सबसे ऊपर होता है। पत्रकारों को हमेशा देश हित को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रसारण करना चाहिए और निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक पत्रकारों को निष्पक्ष नहीं होना चाहिए बल्कि पत्रकार को हमेशा सत्य और देश का पक्ष लेना चाहिए। रुबिका लियाकत ने कहा कि पत्रकारों को मुखर होकर निडरता से अपनी बात कहनी चाहिए। आलोचना और ट्रोल्स के दबाव में नहीं आना चाहिए।



नारद जयंती के अवसर पर आयोजित इस समारोह में विश्व संवाद केन्द्र की ओर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार रजत वसिष्ठ, समाचार पत्र जुड़े संजय रामगिरीवार, फोटोग्राफर विशाल महाकालकर, सिटीजन जर्नलिस्ट लखेश्वर चंद्रवंशी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर्स निखिल चंदवानी को देवर्षि नारद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही सुनील आंबेकर द्वारा लिखित “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वर्णिम भारत के दिशा-सूत्र” पुस्तक के मराठी संस्करण का लोकार्पण भी किया गया।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement