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इस्लाम विरोधी नहीं है समान नागरिक संहिता, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चलाएगा जागरुकता अभियान

Date : 17-Jun-2023

 नई दिल्ली, 17 जून । वन नेशन, वन पीपल, वन लॉ यानी कॉमन सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच देशभर में ज़ोरदार मुहिम चलाएगा। इसके लिए मंच के कार्यकर्ता देशभर में जन जागरण अभियान चलाएंगे। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की शनिवार को दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में इसकी घोषणा की गई और आगामी योजना पर भी विचार विमर्श हुआ।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संस्थापक इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मोहम्मद अफजाल, शाहिद अख्तर, गिरीश जुयाल, ताहिर अब्बास, एसके मुद्दीन, अबू बकर नकवी, विराग पाचपोर, इस्लाम अब्बास, माजिद तालिकोटी, रजा हुसैन रिजवी, इरफान अली, शालिनी अली, रेशमा हुसैन, शहनाज अफजाल, खुर्शीद रजाका, शिराज़ कुरैशी, फैज़ खान, बिलाल उर रहमान, फारूक खान, अल्तमश बिहारी समेत मंच के सभी राष्ट्रीय संयोजक, क्षेत्रीय संयोजक, प्रकोष्ठों के संयोजक एवं सह संयोजकों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं की बहुत बड़ी संख्या ऑनलाइन भी शामिल हुई। बैठक में 400 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए।


एमआरएम के मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने बताया कि यह तय हुआ है कि देशभर में कार्यकर्ताओं का समूह लाखों परिवार के बीच पहुंचेगा और सौहार्द, समरसता, भाईचारा, एकता, अखंडता की पुरजोर कोशिशें करते हुए समान नागरिक संहिता को शक्तिशाली और खुशहाल देश की जरूरत बताएगा। मंच के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं में पूर्ण सहमति देखी गई जब यह मुद्दा उठा कि इस साजिश को मुसलमानों को समझना चाहिए कि आखिर आजादी के 75 वर्षों बाद भी वे सर्वाधिक पिछड़े क्यों हैं जबकि 60 वर्षों तक तो तथाकथित सेकुलर दलों और तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली सरकारें रहीं? जबकि स्थिति यह है है कि 25 करोड़ मुसलमानों में से 3 प्रतिशत भी आज की तारीख में ग्रेजुएट नहीं हैं। जब शिक्षा का यह आलम होगा तो बेरोजगार और अस्वस्थ समाज तो रहेगा ही।

बैठक में सर्वसम्मति से यह पारित हुआ कि समान नागरिक संहिता कहीं से भी इस्लाम और मुस्लिम विरोधी नहीं है। मंच का मानना है कि यह कानून लोगों के दिलों से नफरत मिटाएगा और भाईचारा लाएगा। जबकि इसका विरोध धर्मों, जातियों, समुदायों में कटुता और हिंसा पैदा करना है। मंच का मानना है कि इन राष्ट्रवादी मुद्दों पर मुसलमानों को भड़काने वाले लोग मुसलमान और इस्लाम के दुश्मन हैं।

मंच का मानना है कि यह कानून किसी भी जाति, धर्म और समुदाय के विरुद्ध नहीं है बल्कि सब धर्मों का सम्मान और सुरक्षा करता है तथा सब में भाईचारे वाला काम करता है। बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि जो भी इस राष्ट्रवादी कानून का विरोध करते हैं वो दरअसल धर्मों के बीच भाईचारा और सौहार्द नहीं चाहते हैं।

इससे पहले भोपाल में हुए अभ्यास वर्ग में वन नेशन, वन पीपल, वन लॉ को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ था और यह तय किया गया था कि दिल्ली में होने वाली बैठक में इस पर गहन विचार मंथन के बाद देशभर के कार्यक्रमों को लेकर योजना बनाई जाएगी।


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