नई दिल्ली, 19 जून (हि.स.)। भारत की यात्रा पर सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे वियतनाम के रक्षा मंत्री फान वान गियांग के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्विपक्षीय बैठक की। इससे पहले जनरल फान वान गियांग ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी। उन्होंने तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इस दौरे पर वियतनाम के रक्षा मंत्री के साथ ब्रह्मोस मिसाइलों का सौदा फाइनल होने और डील पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक से पहले अपने समकक्ष जनरल फान वान गियांग की अगवानी की। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद जनरल गियांग ने तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके बाद जनरल फान वान गियांग के साथ उपयोगी बैठक के दौरान भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई। द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा मंत्री के साथ भारतीय सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने भी शामिल हुए।
दरअसल, चीन के साथ चल रही खटपट के बीच वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल लेकर दक्षिण चीन सागर में तैनात करना चाहता है। इससे दक्षिण चीन सागर और उसके आसपास के इलाके में चीन का खौफ कम होगा और साथ ही वियतनाम के साथ भारत के संबंध और मजबूत होंगे। इस बीच चीन ने भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार आदि को कई तरह के संवेदनशील हथियार देकर भारत की सुरक्षा पर आंच डाली है, लेकिन अब भारत ने भी चीन के दुश्मन देशों को ब्रह्मोस देकर 'जैसे को तैसा' वाली नीति अपना ली है।
सूत्रों ने बताया कि वियतनाम से ब्रह्मोस मिसाइलों की तीन से पांच इकाइयों के बीच ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। प्रत्येक बैटरी के साथ कई मिसाइलें शामिल हैं, जिसकी कीमत लगभग 125 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है, इसलिए संभावित सौदा 375 मिलियन या 625 मिलियन डॉलर के बीच हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वियतनाम ब्रह्मोस की कितनी इकाइयों का अधिग्रहण करना चाहता है। दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन की बढ़ती दादागीरी के बीच भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंध और ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। फिलीपींस के बाद अब वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइलों का सौदा फाइनल होने के करीब है।
