मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने गुरुवार को आईसीएआर-सीएमएफआरआई-विझिंजम क्षेत्रीय केंद्र के दौरे के दौरान किसानों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केंद्र तटीय समुदायों की आय और आजीविका को बढ़ाने और मत्स्य पालन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर-सीएमएफआरआई के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार देश के तटीय जल में बीज उत्पादन और बाइवाल्व्स- मसल्स, खाद्य सीप और मोती सीप की खेती के विकास पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने यहां कहा कि तटीय जल में टिकाऊ उत्पादन के लिए मसल्स हैचरी विकसित करने का प्रस्ताव से मोती सीपों के प्राकृतिक आवास को बहाल करने में मदद मिलेगी। संसाधन के संरक्षण के साथआर्थिक स्थिरता आएगी। सीपियों और सीपों के प्राकृतिक आवास मिलेगा और जीवंत होने से मछुआरों के परिवारों की आजीविका सहज ही उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि आईसीएआर-सीएमएफआरआई, विझिंजम केंद्र में जीवित फीड का सबसे बड़ा भंडार है। यह देश में मछली और शेलफिश हैचरी संचालन की उत्पादकता और मछली बीज उत्पादन की दक्षता बढ़ाने के लिए जीवित फीड के केंद्रीय स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है। इस दौरान उन्होंने तिरुवनंतपुरम में समुद्री मछली हैचरी के वैज्ञानिकों व मछली किसानों से बातचीत की। उन्होंने सिल्वर पोम्पानो के नेशनल ब्रूड बैंक, समुद्री सजावटी और लाइव फीड कल्चर यूनिट और बाइवेल्व हैचरी का दौरा किया।
