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जब बॉलीवुड के गानों में पिरोए गए हरिवंश राय बच्चन के बोल

Date : 27-Nov-2023

हरिवंश राय बच्चन का नाम उत्तर छायावाद काल के सबसे मशहूर कवियों में गिना जाता है. उन्हें आदर्श मानने वाले लोगों की कमी नहीं है. उन्होंने अपने महाकाव्य मधुशाला के जरिए सभी को साहित्य के मदिरालय से परिचित कराया. वे यूं तो संवेदनशील कवियों में से एक रहे हैं साथ ही उन्होंने आशावादी कविताएं भी लिखी हैं. उनकी खास बात ये थी कि वे अपनी लयबद्धिता से कविता के हुस्न में जान सी फूंक देते थे. उनके मिजाज में ढलकर कविताएं एक खूबसूरत स्वरूप ले लेती थीं जो सुनने में भी उतना ही मधुर लगता था और पढ़ने में उतना ही खुशनुमा.

बॉलीवुड में यूं तो राज हरिवंश राय बच्चन के बेटे अमिताभ बच्चन का रहा. लेकिन बॉलीवुड का साहित्य भी इस महान कवि की रचना को शामिल किए बिना रह नहीं पाया. आइये हरिवंश राय बच्चन जी की 116वीं जयंती के मौके पर जानते हैं उनकी उन कविताओं के बारे में जिन्हें बॉलीवुड फिल्मों में शामिल किया गया.

1- कोई गाता मैं सो जाता- हरिवंश राय बच्चन के बेटे अमिताभ बच्चन की फिल्म अलाप साल 1977 में आई थी. इसमें अमिताभ ने एक ऐसे गायक का रोल प्ले किया था जिसकी उसे पिता संग नहीं बनती. इसमें हरिवंश राय बच्चन की लिखी गई लोरी को शामिल किया गया था जिसके बोल थे कोई गाता मैं सो जाता. इसे महान गायक के जे येशुदास ने गाया था.

2- रंग बरसे- सिलसिला फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर की सबसे रोमांटिक फिल्म मानी जाती है. इस फिल्म में रेखा संग उनकी केमिस्ट्री ने जवां दिलों की धड़कने तेज कर दी थी. इसी में होली पर एक सीन था जिसपर गाना फिल्माया गया. इसके बोल हरिवंश राय बच्चन ने ही लिखे थे. आज भी इस गाने का असर ऐसा है कि होली पर इसे सबसे ज्यादा सुना जाता है.

3- अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ- अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ में इस कविता शामिल किया गया जो इस फिल्म की आत्मीयता का सार थी. जब बाद में इसका सीक्वल बना तो फिर से इस फिल्म में बच्चन साहब की इस कविता को जगह मिली. फिल्म की वजह से उनकी ये कविता और भी लोकप्रिय हो गई.


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