भारत और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल और व्यापक सुधारों की जोरदार मांग की है। दोनों ने चेतावनी दी कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों और संघर्षों के बीच सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना उसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर गंभीर दबाव डाल रही है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सार्थक सुधारों के तहत सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रभावी प्रवर्तन को सुनिश्चित किया जा सके। वे सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की पुष्टि पर आयोजित एक उच्चस्तरीय खुली बहस को संबोधित कर रहे थे। श्री हरीश ने कहा कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में परिषद की लगातार विफलता एक गंभीर कमी है, जो संयुक्त राष्ट्र की साख की कड़ी परीक्षा ले रही है।
इस अवसर पर महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में कानून का शासन धीरे-धीरे “जंगल के कानून” में बदलता जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार अब अनिवार्य हो गया है।
गुटेरेस ने रेखांकित किया कि सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र ऐसा निकाय है, जिसके निर्णय सभी सदस्य देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी अन्य निकाय या अस्थायी गठबंधन के पास शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनुपालन सुनिश्चित करने का अधिकार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बल प्रयोग को अधिकृत करने का अधिकार केवल सुरक्षा परिषद के पास है, जो इसे एक विशिष्ट और सार्वभौमिक जिम्मेदारी प्रदान करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले आठ दशकों में वैश्विक सत्ता संतुलन, जनसांख्यिकी और चुनौतियों के स्वरूप में व्यापक बदलाव आए हैं, लेकिन सुरक्षा परिषद अब भी बीते युग की संरचना में फंसी हुई है। उन्होंने स्थायी और अस्थायी—दोनों श्रेणियों में विस्तार सहित व्यापक सुधारों का आह्वान करते हुए कहा कि परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को मजबूत करने के लिए सुधार अत्यंत आवश्यक हैं।
