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नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल मॉरीशस के दौरे पर जाएंगे, भारतीय विदेशमंत्री से भी होगी मुलाकात

Date : 07-Apr-2026

 काठमांडू, 07 अप्रैल । नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल मॉरीशस की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह 10 अप्रैल को मॉरीशस में इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में होने वाले हिंद महासागर सम्मेलन (इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस) में भाग लेने के लिए गुरुवार को प्रस्थान करेंगे। विदेशमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला विदेश दौरा होगा।

यह सम्मेलन मॉरीशस सरकार और भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय “हिंद महासागर के सुशासन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी” रखा गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर क्षेत्री ने जानकारी दी कि मंत्री खनाल सम्मेलन में भाग लेने के लिए मॉरीशस जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में भारतीय विदेशमंत्री एस. जयशंकर सहित विभिन्न देशों के विदेशमंत्री और उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि नेपाल के विदेशमंत्री खनाल सम्मेलन के दौरान अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस. जयशंकर के साथ ‘साइडलाइन’ बैठक भी करेंगे। इसके अलावा अन्य देशों के नेताओं के साथ भी उनकी द्विपक्षीय मुलाकातें तय हैं। सम्मेलन में खलिलुर रहमान (बांग्लादेश), विजिथा हेराथ (श्रीलंका), डीएन ढुंगेल (भूटान), बद्र हमाद अल बुसैदी (ओमान) और बैरी फाउर (सेशेल्स) समेत कई देशों के विदेश मंत्री संबोधित करेंगे। इसके अलावा कंबोडिया, मिस्र, मेडागास्कर, सऊदी अरब, सिंगापुर, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम के अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे।

इंडिया फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2016 से इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है और इसमें नेपाल की नियमित भागीदारी रही है। पिछले वर्ष फरवरी में मस्कट में आयोजित आठवें सम्मेलन में तत्कालीन विदेशमंत्री आरजु राणा देउवा ने हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना, समुद्री व्यापार को सुदृढ़ करना, आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना और समुद्री संसाधनों के संरक्षण के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करना है।

इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के लिए साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक प्रमुख मंच बन चुका है। यह सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने हेतु साझेदार देशों को एक साझा मंच पर लाने का कार्य करता रहा है।


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