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ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का हेगसेथ ने किया बचाव

Date : 01-May-2026

 वाशिंगटन, 01 मई । अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का बचाव किया है। इस सैन्य अभियान पर राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ गुरुवार को सीनेट सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई में पहुंचे। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को फिलहाल संसद (कांग्रेस) की अनुमति की जरूरत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा सैन्य विराम (युद्ध विराम/सीज फायर) की स्थिति 60 दिन की कानूनी समय सीमा की बाध्यता को प्रभावी रूप से रोक देती है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस सुनवाई की आश्वयकता 1973 के वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन की वजह से पड़ी। इस रिजोल्यूशन के अनुसार राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर 60 दिन के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है या अभियान को समाप्त करना पड़ता है। ईरान संघर्ष के मामले में यह समय सीमा पास है। हेगसेथ का तर्क है कि युद्ध विराम के चलते यह नियम अभी लागू नहीं होता। वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून इस व्याख्या का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह गंभीर कानूनी सवाल है।

सीनेट के बहुमत दल के नेता जॉन थ्यून ने गुरुवार को यह संकेत दिया कि उनका सदन निकट भविष्य में युद्ध को मंजूरी देने वाले किसी भी प्रस्ताव पर वोट नहीं करेगा। अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने घोषणा की कि अगर उन्हें अगले सप्ताह तक व्हाइट हाउस से कोई विश्वसनीय योजना नहीं मिलती है, तो वह इस बात पर एक प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही हैं कि क्या युद्ध को औपचारिक रूप से मंजूरी दी जाए।

इस सीनेटर ने सदन के पटल से कहा, "मैं यह स्वीकार नहीं करती कि हमें बिना किसी स्पष्ट दिशा या जवाबदेही के एक अनिश्चितकालीन सैन्य कार्रवाई में शामिल होना चाहिए। कांग्रेस की एक भूमिका है। कांग्रेस को आगे बढ़कर उस भूमिका को निभाना होगा। उस दायित्व को पूरा करना होगा जो संविधान ने हमें सौंपा है। मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली के अनुसार, इस युद्ध में हम एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। कानून के तहत, प्रशासन के पास अतिरिक्त 30 दिनों का अनुरोध करने की क्षमता है। यह बेहतर विकल्प है।

इस सुनवाई में ईरान के लड़कियों के एक स्कूल में कथित हमले का मुद्दा भी उठा। इस हमले 170 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इस हमले पर अनेक सांसदों ने सैन्य जवाबदेही पर सवाल उठाए। पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन अब एआई सहायता प्राप्त सिस्टम के साथ मानवीय निगरानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरे डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि देश के नागरिक इस संघर्ष का समर्थन नहीं करते। कैलिफोर्निया के सीनेटर एडम शिफ का कहना है कि यह युद्ध शुरू से ही गैरकानूनी था, क्योंकि अमेरिका पर कोई हमला नहीं हुआ था, और न ही हमले का कोई आसन्न खतरा था।

हेगसेथ ने कहा कि ऐसा नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन को जनता का समर्थन हासिल है। हेगसेथ के दावे पर गिलिब्रैंड ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध से अमेरिका पहले से ज्यादा सुरक्षित हुआ है, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है और न ही ईरान की ओर से तत्काल खतरे के प्रमाण है। इस सुनवाई से इतर ट्रंप ने ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई से ईरान में बड़े पैमाने पर हत्याएं रोकी गई हैं। ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया गया है। यह युद्ध नहीं, महज सैन्य अभियान है। ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है। तेल से होने वाली उसकी कमाई लगभग बंद है।

क्या है वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन

यह रिजोल्यूशन वियतनाम युद्ध के समय अस्तित्व में आया था। इसके अनुसार अगर युद्ध 60 दिन से ज्यादा चलता है तो कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि कांग्रेस ने किसी युद्ध को मंजूरी देने के लिए मतदान नहीं किया है, तब भी राष्ट्रपति के पास किसी आसन्न खतरे या देश पर हुए किसी हमले का जवाब देने के लिए सैन्य कार्रवाई करने के लिए 60 दिन का समय होता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस की साफ मंजूरी के बिना, जैसे ही यह समय सीमा पूरी हो जाती है राष्ट्रपति को अमेरिका की सेना का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञ 1 मई (शुक्रवार) को 60 दिन की समय सीमा का दिन मान रहे हैं। वह कहते हैं कि ऐसा इसलिए कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को बताया था कि युद्ध शुरू हो गया है।

वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन को '60 दिन की घड़ी' भी कहा जाता है। यह कानून राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण करता है, ताकि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के लंबे समय तक युद्ध को न चलाया जा सके।


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