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नेपाल में संविधान संशोधन के पांच मुख्य विषयों पर विभिन्न क्षेत्र से संवाद

Date : 18-May-2026

 काठमांडू, 18 मई । बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संविधान संशोधन पर बहस-पत्र तैयार करने के लिए गठित कार्यदल विभिन्न सरोकार वाले पक्षों के साथ संवाद कर ५ विषयों को प्राथमिकता में रख कर विचार विमर्श रहा है।

प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह के नेतृत्व में गठित यह कार्यदल कार्यदल विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, संवैधानिक विशेषज्ञों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार चर्चा कर रहा है।

इस कार्यदल के संयोजक शाह ने बताया कि कार्यदल ने मुख्य रूप से पांच विषयों—शासन प्रणाली, निर्वाचन प्रणाली, संघीयता, न्यायपालिका और संवैधानिक निकाय—को प्राथमिकता में रखा है। इसके अलावा अन्य विविध विषय भी शामिल किए गए हैं। इन सभी शीर्षकों के अंतर्गत कुल 46 बिंदुओं को समेटा गया है।

सरकार ने शासन प्रणाली में बदलाव के मुद्दे को विशेष प्राथमिकता दी है। वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखने, पूर्ण संसदीय व्यवस्था अपनाने या संशोधित संसदीय प्रणाली लागू करने जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की व्यवस्था होनी चाहिए या नहीं, इस विषय पर भी राय मांगी गई है। शाह के मुताबिक इसी तरह विशेषज्ञ मंत्रियों की व्यवस्था तथा सांसदों को मंत्री न बनाए जाने की प्रणाली उपयुक्त होगी या नहीं, इस पर भी सरकार ने रुचि दिखाई है। मंत्रिपरिषद गठन और मंत्रियों की जवाबदेही जैसे विषयों पर भी चर्चा जारी है।

निर्वाचन प्रणाली को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार ने इसे भी प्राथमिकता दी है। संविधान संशोधन के प्रस्ताव में प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली, पूर्ण समानुपातिक प्रणाली अथवा मिश्रित निर्वाचन प्रणाली की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्रदेश व्यवस्था से जुड़े विषयों में प्रदेशों की संख्या और प्रादेशिक संरचना में किए जा सकने वाले सुधारों पर विशेषज्ञों की राय मांगी गई है। साथ ही प्रत्यक्ष निर्वाचित मुख्यमंत्री की व्यवस्था भी चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है।

स्थानीय निकाय से संबंधित तीन प्रमुख विषय भी इसमें शामिल किए गए हैं। इनमें वर्तमान दलीय व्यवस्था के साथ स्थानीय निकायों को जारी रखने या दलविहीन व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा आधारित स्थानीय व्यवस्था अपनाने के विकल्पों पर राय ली जा रही है। इसके अलावा स्थानीय तह को अधिक जवाबदेह बनाने और न्यायिक समितियों में सुधार के उपायों पर भी चर्चा हो रही है।

सरकार ने न्यायपालिका में सुधार के लिए संविधान के किन प्रावधानों में बदलाव आवश्यक है, इस विषय को भी बहस में शामिल किया है। स्वतंत्र, निष्पक्ष और सक्षम न्यायपालिका सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। संवैधानिक निकायों में किए जाने वाले सुधारों का मुद्दा भी कार्यदल ने उठाया है। इसमें संवैधानिक निकायों की संख्या, पदाधिकारियों की संख्या, नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उपाय, तथा उनकी स्वायत्तता और जवाबदेही के बीच संतुलन कायम करने के तरीकों पर चर्चा प्रस्तावित की गई है।


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