धमतरी, 18 मई। धमतरी जिले के नगरी ब्लाॅक अंतर्गत कौहाबाहरा में विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के लिए जनमन योजना के तहत बनाए जा रहे आवास अब सरकारी लापरवाही की तस्वीर बनकर खड़े हैं। गांव में चार आवास पिछले एक वर्ष से अधूरे पड़े हैं, जिससे हितग्राही परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बरसात नजदीक आने के कारण इन परिवारों के सामने सिर छुपाने की चिंता और गहरा गई है।
ग्रामीणों के अनुसार आवास निर्माण की जिम्मेदारी गांव के ही एक व्यक्ति को सौंपी गई थी। निर्माण कार्य के लिए हितग्राहियों ने लगभग एक लाख रुपये की राशि भी उसे उपलब्ध करा दी, लेकिन कुछ दिनों तक काम करने के बाद निर्माण अचानक बंद कर दिया गया। तब से लेकर अब तक न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही जिम्मेदारों ने कोई सुध ली। अधूरे पड़े मकानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। दीवारों में लगी ईंटें बारिश और धूप से कमजोर होकर घुलने लगी हैं, वहीं लोहे के सरिए, दरवाजे और खिड़कियों में जंग लग रही है। समय पर निर्माण पूरा नहीं होने से सरकारी राशि और निर्माण सामग्री दोनों बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द निर्माण शुरू नहीं हुआ तो आने वाली बारिश में ये मकान पूरी तरह जर्जर हो सकते हैं।
गौरतलब है कि यह आवास विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के परिवारों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। कमार जनजाति को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र भी कहा जाता है और इनके विकास के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। इसके बावजूद आवास निर्माण में बरती जा रही लापरवाही कई सवाल खड़े कर रही है। मामले में जनपद पंचायत सीईओ बोरझा ने बताया कि प्रति कमार परिवार को आवास निर्माण के लिए एक लाख रुपये जारी की गई की थी, पर इसमें से ठेकेदार को 80 प्रतिशत ही राशि प्रदान की गई। मनरेगा के तहत मस्टरोल की राशि भी दी गई उसे भी उसे भी संबंधित परिवार ने खर्च कर दिया। निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त पैसा ठेकेदार को नहीं मिलने से कार्य अधूरा है। जिस व्यक्ति ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ली है, उसे समय पर कार्य पूरा करना चाहिए। स्वीकृत सभी आवासों को दो महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश लगातार दिए जा रहे हैं।
