काठमांडू, 19 मई । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्त पोषण पर रोकथाम को लेकर निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंसियल एक्सन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के एशिया-प्रशांत क्षेत्र समूह (एपीजी) ने नेपाल के पर्याप्त प्रगति नहीं दिखाने पर ‘ब्लैक लिस्ट’ में डालने की चेतावनी दी है। एपीजी ने कहा कि ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए आवश्यक सुधारों में नेपाल की प्रगति निराशाजनक रही है।
एपीजी ने स्पष्ट किया कि यह दौरा आगामी सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले अंतिम उच्चस्तरीय हस्तक्षेप है। यानी नेपाल के पास अब चार महीने से भी कम समय बचा है। एपीजी की तीन दिवसीय बैठक काठमांडू में सोमवार से जारी है। रविवार को काठमांडू पहुंचे एपीजी के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सरकारी निकायों के अधिकारियों के साथ बैठक की।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस बार एपीजी ने अपने उपकार्यकारी सचिव डेविड सैनन के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नेपाल भेजा है। किसी वरिष्ठ अधिकारी की प्रत्यक्ष उपस्थिति को नेपाल की स्थिति की गंभीरता का संकेत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय, नेपाली सेना, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी, नेपाल राष्ट्र बैंक तथा सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसंधान विभाग सहित विभिन्न निकायों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एपीजी के प्रतिनिधियों ने नेपाल की प्रगति पर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की।
प्रधानमंत्री कार्यालय में सोमवार को हुई बैठक में कानून सचिव पुष्कर सापकोटा, वित्त सचिव घनश्याम उपाध्याय, गृह सचिव राजकुमार श्रेष्ठ और राजस्व सचिव भूपाल बराल सहित अन्य सरकारी अधिकारी शामिल थे।
एफएटीएफ ने 21 फरवरी 2025 को नेपाल को दो वर्षों के लिए ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था। इससे पहले एफएटीएफ ने नेपाल को 15 बिंदुओं पर निर्देश दिए थे और सन् 2027 तक उन्हें पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी लेकिन वर्तमान प्रगति को देखते हुए यह लक्ष्य कठिन दिखाई दे रहा है।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले लगातार कहते रहे हैं कि नेपाल को ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘ग्रे लिस्ट’ में रहने से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है, इसलिए सरकार तय समय के भीतर इससे बाहर निकलने के लिए प्रयासरत है। वाग्ले ने यह भी कहा कि ‘ग्रे लिस्ट’ का असर निवेश वातावरण पर नकारात्मक पड़ता है और सम्पत्ति शुद्धीकरण जैसे वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों में वर्षों से चल रही जांच ठोस प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
एपीजी का निष्कर्ष है कि ‘ग्रे लिस्ट’ में आने के बाद नेपाल नीतिगत हस्तक्षेप, कानून लागू करने, अनुसंधान निकायों की क्षमता वृद्धि, जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं कर सका है।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अब तक विभाग की ओर से 121, कानून संशोधन के बाद पुलिस की ओर से 21, एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से 6 तथा वन एवं राजस्व अनुसंधान विभाग की ओर से एक–एक मामला दर्ज किया गया है। एपीजी अधिकारियों ने इन मामलों की संख्या को नाकाफी बताते हुए कहा कि जटिल मामलों में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। नेपाल इससे पहले भी सन् 2011 में ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल हुआ था और सन् 2014 में उससे बाहर निकलने में सफल हुआ था।
उल्लेखनीय है कि एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट उन देशों की एक सूची होती है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण रोकने में विफल रहे हैं। ग्रे लिस्ट किसी देश के लिए सजा नहीं, बल्कि एक चेतावनी होती है। जब कोई देश एफएटीएफ द्वारा दिए गए सुधार लक्ष्यों को पूरा कर लेता है, तो उसे इस सूची से बाहर निकाल दिया जाता है।
