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नौसेना ने विदेशी जहाजों को डाकुओं से छुड़ाकर समुद्र में दबदबा कायम किया

Date : 31-Jan-2024

 लाल सागर में छह साल तक शांति रहने के बाद पिछले दो माह से सोमालियाई समुद्री डाकुओं की हरकतें बढ़ने से दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग लेन में उथल-पुथल बढ़ गई है। भारतीय नौसेना पिछले एक महीने से लाल सागर में समुद्री व्यापारिक मार्गों को बचाने और सुरक्षित करने में प्रभावी ढंग से काम कर रही है। भारत ने लाल सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती रोकने के लिए अपने दस से ज्यादा जहाज ‘एंटी पायरेसी मिशन’ पर तैनात किये हैं। नौसेना ने इस बीच आधा दर्जन से ज्यादा अपहृत विदेशी जहाजों को समुद्री डाकुओं से छुड़ाकर समुद्र में अपना दबदबा कायम किया है।

समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत हिंद महासागर के चारों ओर तैनात हैं। भारतीय नौसेना ने 36 घंटे के भीतर दक्षिणी अरब सागर में दो समुद्री डकैतियों को नाकाम किया है। हूती विद्रोहियों ने इसी हफ्ते ईरानी और पाकिस्तानी नौकाओं को बंधक बनाकर दो बार हमला किया है। इन हमलों के बाद भारतीय नौसेना ने दो माह के भीतर सात अपहृत विदेशी जहाजों को समुद्री डाकुओं से छुड़ाकर चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाया है। अरब सागर में कोच्चि से 700 समुद्री मील दूर पश्चिम में सोमालियाई समुद्री डाकुओं ने 28 जनवरी को मछली पकड़ने वाले ईरानी जहाज एमवी इमान का अपहरण कर लिया था। भारतीय युद्धपोत सुमित्रा ने मछली पकड़ने वाले जहाज इमान को सुरक्षित बचाकर सोमालियाई लुटेरों को निहत्था करके सोमालिया की ओर खदेड़ दिया।

इसी तरह कोच्चि से लगभग 850 नॉटिकल मील पश्चिम में दक्षिणी अरब सागर में पाकिस्तानी जहाज अल नईमी और उसके चालक दल के 19 पाकिस्तानी नागरिकों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली। युद्धपोत सुमित्रा ने 29 जनवरी को अपने हेलीकॉप्टर की मदद से अपहृत जहाज को घेरकर पाकिस्तानी चालक दल और जहाज की सुरक्षित रिहाई कराई और 11 समुद्री लुटेरों को भागने के लिए मजबूर कर दिया। भारत के नौसेना कमांडो ने पाकिस्तानी जहाज अल नईमी को समुद्री डाकुओं के चंगुल से मुक्त कराया है। इन दोनों ऑपरेशन में व्यापारिक जहाज़ों को छुड़ाने के साथ ही चालक दल के 36 सदस्यों को सुरक्षित बचाया है, जिसमें 17 ईरानी और 19 पाकिस्तानी नागरिक हैं।

भारतीय नौसेना ने 29 जनवरी को ही श्रीलंकाई मछली पकड़ने वाले जहाज ‘लोरेंज़ो पुथा 04’ को मोगादिशु से लगभग 955 नॉटिकल मील पूर्व में सोमालियाई समुद्री लुटेरों से बचाया। श्रीलंकाई मछली पकड़ने वाले जहाज के अपहरण पर भारतीय नौसेना ने सेशेल्स रक्षा बलों और श्रीलंकाई नौसेना के सहयोग से अपहृत जहाज को सफलतापूर्वक रोका और बचाया। नौसेना ने तत्काल अपहृत जहाज की निगरानी करने के लिए आईएनएस शारदा युद्धपोत के साथ अपने हेलीकॉप्टर एमक्यू-9 बी सी गार्डियन यूएवी को तैनात किया। इसके बाद 3 सशस्त्र समुद्री डाकू गिरफ्तार किए गए और जहाज के 6 सदस्यीय चालक दल को बचा लिया। चालक दल के सभी छह सदस्य सुरक्षित हैं और जहाज को माहे (सेशेल्स) ले जाया गया है।

इसके अलावा पिछले साल दिसंबर में माल्टीज़-ध्वजांकित एमवी रीयून को हाइजैक किया गया, जिसके बाद लाल सागर सुरक्षा स्क्वाड्रन में भाग लेने वाले एक भारतीय जहाज के नेतृत्व में समुद्री लुटेरों का पीछा किया। इस दौरान फायरिंग में एक समुद्री डाकू घायल हो गया और बाद में 17 अन्य समुद्री डाकुओं को खदेड़ दिया गया। ईरान समर्थित हूती उग्रवादियों ने 23 दिसंबर को लाल सागर में दो जहाजों पर ड्रोन हमला किया था, जिसमें गैबॉन के स्वामित्व वाला कच्चा तेल टैंकर एमवी साईबाबा और लाइबेरिया के झंडे वाला एमवी चेम्प प्लूटो जहाज थे। भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना के जहाजों ने मौके पर पहुंचकर सहायता की और दोनों जहाजों की आग बुझाई।

इसी माह की शुरुआत में 04 जनवरी को अरब सागर में समुद्री डाकुओं ने सोमालिया तट के पास लाइबेरियाई जहाज एमवी लीला नोरफोक को अपहृत किया। भारतीय नौसेना ने तत्काल एक समुद्री गश्ती विमान (एमपीए) लॉन्च किया और जहाज की सहायता के लिए आईएनएस चेन्नई को मौके पर भेजने के लिए डायवर्ट कर दिया। भारतीय नौसेना की सिर्फ चेतावनी के बाद डाकू अपहृत जहाज को छोड़कर भाग निकले। डाकुओं से मुक्त होने के बाद ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ जहाज के भारतीय दल ने नौसेना को धन्यवाद दिया। इसी तरह 17/18 जनवरी की रात अदन की खाड़ी में मार्शल द्वीप के ध्वज वाले जहाज एमवी जेनको पिकार्डी पर ड्रोन से हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई। भारतीय नौसेना ने जहाज पर सवार 09 भारतीयों समेत 22 चालक दल को सुरक्षित बचाया।



हूती उग्रवादियों की बढ़ती गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए अदन की खाड़ी में तैनात किये गए निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम को 26 जनवरी की रात में ब्रिटिश जहाज एमवी मर्लिन लुआंडा पर मिसाइल हमले की जानकारी मिली। इस पर नौसेना ने अपने निर्देशित मिसाइल विध्वंसक ‘विशाखापत्तनम’ को मौके पर भेजा। मिसाइल हमले से जहाज पर लगी आग इतनी भीषण थी कि जहाज के चालक दल ने जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ दी थी। इसके बावजूद ब्रिटिश जहाज में लगी आग 6 घंटे में बुझाकर भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अदन की खाड़ी में अपनी मौजूदगी का एहसास कराया। इतना ही नहीं, जहाज पर सवार 23 सदस्यीय चालक दल को बचाया, जिसमें 22 भारतीय थे।


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