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बंगाल में भाजपा नेताओं पर हमले को लेकर शमिक भट्टाचार्य ने अमित शाह को लिखा पत्र, केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग

Date : 07-Aug-2025

कोलकाता, 07 अगस्त। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में इन हमलों को राज्य में कानून व्यवस्था के पतन और राजनीतिक असहिष्णुता के बढ़ते माहौल का परिणाम बताया गया है।

भट्टाचार्य ने पत्र में लिखा है कि शुभेंदु अधिकारी जब पांच अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर कूचबिहार में पुलिस अधीक्षक कार्यालय जा रहे थे, उसी दौरान खागराबाड़ी मोड़ के पास उनके काफिले पर हथियारबंद हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से हमला किया। पत्थरबाजी की गई और जानबूझकर उन्हें तथा उनके साथ मौजूद नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। यह हमला उस वक्त हुआ जब अधिकारी ‘कन्या सुरक्षा यात्रा’ के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध और राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था के मुद्दे पर शांतिपूर्ण जनसंपर्क अभियान चला रहे थे।

पत्र में यह भी कहा गया है कि हमले की आशंका पहले ही प्रशासन को दी गई थी, इसके बावजूद कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किया गया। इससे यह संदेह और गहराता है कि या तो प्रशासन ने गंभीर लापरवाही बरती या हमलावरों से मिलीभगत थी। भाजपा ने इस हमले को पहले से चल रही राजनीतिक हिंसा की एक कड़ी बताया है। इससे पहले भाजपा विधायक सुशील बर्मन, बारेन बर्मन और निखिल रंजन देय पर भी हमले हो चुके हैं।

शमिक भट्टाचार्य ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि छह अगस्त को उत्तर 24 परगना के बारासात में भी ऐसी ही हिंसा हुई, जहां यात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर दोबारा पथराव किया गया और उन्हें काले झंडे दिखाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हिंसा तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा जानबूझकर कराई गई ताकि राज्य में अशांति फैलाई जा सके और भाजपा के शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों को बाधित किया जा सके।

पत्र में इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा गया है कि विपक्ष के नेता पर उस वक्त हमला हुआ जब वे हाई कोर्ट के आदेश पर सरकारी दफ्तर जा रहे थे। ऐसे हमले संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सीधा प्रहार हैं।

भाजपा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए, सुरक्षा देने में विफल रहे पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभी हमलावरों को कानून के तहत गिरफ्तार कर दंडित किया जाए। साथ ही गृह मंत्रालय से एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम को बंगाल भेजने की मांग की गई है ताकि राजनीतिक हिंसा की पृष्ठभूमि का मूल्यांकन किया जा सके। चुनाव आयोग से भी अपील की गई है कि वह राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए।

पत्र के अंत में शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती की परीक्षा है। उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि वह हस्तक्षेप कर संवैधानिक शासन की बहाली सुनिश्चित करें और यह सुनिश्चित करें कि विपक्षी दलों की आवाज को हिंसा और डर के जरिए दबाया न जा सके। पत्र के साथ उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं।


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