उज्जैन, 03 मार्च । मध्य प्रदेश के उज्जैन में होली के पावन अवसर पर शिप्रा तट स्थित श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब दस वर्षों बाद संतों की पेशवाई के रूप में यह आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शहरवासियों ने संतों का जोरदार स्वागत किया।
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से देशभर से संत उज्जैन पहुंचे हैं। वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ (महाकुंभ मेला) को भव्य स्वरूप देने की तैयारी के तहत यह नगर प्रवेश विशेष महत्व रखता है। बताया जाता है कि यह परंपरा लगभग 200 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है।
भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि, मुकामी देवी दास सहित कई निर्वाण संत अखाड़े में पहुंचे।
महंत सत्यानंद ने बताया कि आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संत उज्जैन पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि नगर प्रवेश में शामिल संत सम्पूर्ण भारत में सनातन संस्कृति के प्रचार के उद्देश्य से यहां आए हैं। बुधवार (4 मार्च) को होली उत्सव के तहत अखाड़े में सुबह 9 बजे से दोपहर एक बजे तक साधु-संत और महंत पारंपरिक ढंग से होली उत्सव मनाएंगे। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि देश के सभी अखाड़ों में पंच-परमेश्वर नाम से व्यवस्था होती है। इसके सदस्य उन स्थानों का दौरा करते हैं, जहां महाकुंभ या सिंहस्थ मेला आयोजित होना है। उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ मेला प्रस्तावित है, जिसके मद्देनजर देश के प्रमुख अखाड़ों के पंच-परमेश्वर यहां पहुंचे हैं। वे आठ दिन तक उज्जैन में रुककर सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे।
यहां का कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद संतों का दल नासिक के लिए रवाना होगा, जहां आगामी कुंभ मेले की तैयारियां भी प्रस्तावित हैं। इससे पहले संत वर्ष 2015 में उज्जैन आए थे।
