कोलकाता, 06 मार्च । केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को कोलकाता में जूट, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों और हितधारकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पारंपरिक वस्त्र उद्योगों को नवाचार, विविधीकरण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से मजबूत बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
बैठक में हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के अधिकारी, क्षेत्रीय वस्त्र मंत्रालय के कार्यालयों के प्रतिनिधि, जूट बोर्ड, जूट और संबद्ध रेशा केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संस्थान तथा भारतीय जूट उद्योग अनुसंधान संघ सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक के दौरान गिरिराज सिंह ने कहा कि जूट क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इसमें विविध तथा उच्च मूल्य वाले उत्पादों का विकास हो रहा है। इस अवसर पर उन्होंने जूट आधारित कपड़े से बनी एक जैकेट और शॉल भी धारण किया, जो जूट उद्योग द्वारा विकसित विशेष कपड़े से तैयार किया गया है। इस कपड़े में 60 प्रतिशत जूट के साथ कपास और विस्कोस रेशा मिलाया गया है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से जूट का उपयोग मुख्य रूप से पैकेजिंग सामग्री जैसे थैलों तक सीमित था, लेकिन अब यह क्षेत्र फैशन परिधान और आधुनिक वस्त्र उत्पादों तक विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि जूट आधारित कपड़ों और नए प्रकार के प्राकृतिक रेशों के विकास से किसानों, कारीगरों और उद्योग से जुड़े लोगों को अधिक मूल्य मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जूट और अन्य प्राकृतिक रेशों में प्रौद्योगिकी अपनाने, नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देने से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। इससे बुनकरों, कारीगरों और जूट किसानों को सशक्त बनाने के साथ भारतीय पारंपरिक वस्त्र क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि हथकरघा, हस्तशिल्प और जूट जैसे क्षेत्र देश भर में लाखों कारीगरों और श्रमिकों के लिए रोजगार और आय सृजन के बड़े स्रोत बन सकते हैं। बैठक में इन क्षेत्रों में नवाचार, अनुसंधान, बाजार विस्तार और उत्पाद विविधीकरण को आगे बढ़ाने के उपायों की भी समीक्षा की गई।
