नई दिल्ली, 06 मार्च । केंद्र सरकार ने उद्योग आधारित कौशल विकास को मजबूत करने और युवाओं को उन्नत ऑटोमोबाइल विनिर्माण में प्रशिक्षित करने के लिए बजाज ऑटो लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इस सहयोग के तहत युवाओं को वास्तविक उत्पादन वातावरण में आधुनिक तकनीकों का अनुभव मिलेगा और उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने बताया कि मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने बजाज ऑटो लिमिटेड के साथ फ्लेक्सी-एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत बजाज ऑटो इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर (आईटीपी) के रूप में काम करेगा और महाराष्ट्र व उत्तराखंड स्थित अपने विनिर्माण संयंत्रों में एनएसक्यूएफ-अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा। पहले वर्ष में ही कंपनी ने 1,000 प्रशिक्षुओं को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इन कार्यक्रमों की अवधि 24 माह तक होगी, जिसमें कक्षा शिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक उत्पादन प्रणालियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि यह साझेदारी भारत में उद्योग-आधारित कौशल विकास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि जब प्रशिक्षण वास्तविक उत्पादन वातावरण और आधुनिक तकनीकों से जुड़ा होता है, तो युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलता है और वे नौकरी के लिए तैयार होते हैं।
हस्ताक्षर समारोह में मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, डीजीटी के महानिदेशक दिलीप कुमार, उप महानिदेशक सुनील कुमार गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बजाज ऑटो की ओर से मुख्य मानव संसाधन अधिकारी रवि किरण रामासामी सहित कंपनी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
फ्लेक्सी-एमओयू योजना के तहत उद्योगों को उभरती तकनीकों और क्षेत्रीय मांगों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने की सुविधा मिलती है। योजना में न्यूनतम 100 प्रशिक्षुओं की वार्षिक क्षमता, उद्योग-आधारित मूल्यांकन और डीजीटी द्वारा आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा शामिल है। सफल उम्मीदवारों को राष्ट्रीय ट्रेड सर्टिफिकेट (एनटीसी) दिया जाएगा, जिससे उन्हें अप्रेंटिसशिप के अवसर मिलेंगे।
प्रशिक्षुओं को ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, क्वालिटी कंट्रोल, प्लांट मेंटेनेंस, मेक्ट्रॉनिक्स, वेल्डिंग, असेंबली ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का अनुभव मिलेगा। इस सहयोग से प्रशिक्षुओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उद्योग के लिए कुशल तकनीशियनों की सतत पाइपलाइन तैयार होगी।
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों को कम से कम 50 प्रतिशत सफल प्रशिक्षुओं की नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी। बजाज ऑटो ने कौशल विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है और अपनी सीएसआर व्यय का 70-80 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में लगाया है। कंपनी पहले से ही ‘बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग’, ‘बजाज मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम्स’ और ‘बजाज स्टेप’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हर साल 90,000 से अधिक छात्रों को प्रभावित कर रही है। यह समझौता दस वर्षों तक मान्य रहेगा और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।
