महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए सख़्त कानून, त्वरित न्याय की ज़रूरतः जमात-ए-इस्लामी | The Voice TV

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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए सख़्त कानून, त्वरित न्याय की ज़रूरतः जमात-ए-इस्लामी

Date : 07-Mar-2026

 नई दिल्ली, 07 मार्च । जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने महिलाओं की गरिमा, बढ़ते आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष से जुड़ी चुनौतियों पर गहरी चिंता जताई।

हुसैनी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के उपलक्ष्य में शनिवार को जमात मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हालांकि यह दिन महिलाओं की कामयाबियों और योगदान का जश्न मनाने के लिए है लेकिन महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध हमें याद दिलाते हैं कि सुरक्षा, सम्मान एवं समान अवसर के लिए संघर्ष अभी पूरी नहीं हुई है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार केवल 2022 में भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.45 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए। इनमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, हैरेसमेंट, तस्करी और पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामले शामिल हैं। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष 31,000 से ज़्यादा रेप केस रिकॉर्ड किए गए अर्थात प्रतिदिन लगभग 85 रेप केस रिपोर्ट हुए। महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी अपराधों में से एक-तिहाई से ज़्यादा मामले सिर्फ़ घरेलू हिंसा के हैं, जो दर्शाता है कि हिंसा अक्सर घरों और परिवारों में होती है।

उन्होंने कहा कि इस तस्वीर में महिलाओं के लापता होने की समस्या भी चिंताजनक है। एनसीआरबी के डेटा से पता चलता है कि हर साल पूरे भारत में कई लाख महिलाएं और लड़कियां लापता हो जाती हैं जिनमें से बड़ी संख्या का अभी भी पता नहीं चल पाया है। विशेष तौर पर इनकी तस्करी, जबरन मजदूरी, शोषण और यौन हिंसा का जोखिम बना रहता है। उन्होंने बताया कि यौन शोषण की समस्या समाज में एक गहरे नैतिक संकट को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि एपस्टीन तस्करी नेटवर्क के बारे में जो खुलासे हुए हैं जिसमें ताकतवर लोग कमजोर नाबालिग लड़कियों का व्यवस्थित तरीके से शोषण करते थे, इस खुलासे ने दुनिया भर में लोगों की सोच को हिलाकर रख दिया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद का मानना है कि महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए न सिर्फ़ सख़्त कानून और त्वरित न्याय की ज़रूरत है बल्कि सम्मान, विनम्रता और जवाबदेही पर आधारित एक मज़बूत नैतिक ढांचे की भी ज़रूरत है।

आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए जमात के अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद हलिया घटनाक्रम ने बढ़ते आर्थिक संकट की चिंताओं को और मज़बूत कर दिया है। बजट में आपूर्ति-पक्ष प्रोत्साहन पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया गया, जबकि आय वितरण, रोज़गार सृजन और सामाजिक सुरक्षा पर कम ध्यान दिया गया।

पश्चिम एशिया में युद्ध पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के चल रहे संयुक्त सैन्य हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह हमले राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।


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