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जनगणना-2027 में सरना धर्म कोड का कॉलम शामिल करे केंद्र सरकार : कमलेश

Date : 04-May-2026

 रांची, 04 मई । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और झारखंड के राज्यपाल को पत्र लिखकर जनगणना-2027 में आदिवासी/सरना धर्म को अलग पहचान के रूप में धर्म कोड में शामिल करने की मांग की है।

अपने पत्र में उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान समृद्ध आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति पूजक परंपरा से जुड़ी है। राज्य के आदिवासी समाज का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन प्रकृति पूजा, जंगल और जमीन पर आधारित है, जिसे सरना धर्म के रूप में जाना जाता है। उन्होंने इसे केवल आस्था नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही जीवन पद्धति बताया।

सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि आजादी के बाद अलग झारखंड राज्य के आंदोलन की नींव भी आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और उनकी प्रकृति-आधारित आस्था पर टिकी रही है। ऐसे में जनगणना-2027 में सरना धर्म कोड को शामिल करना आवश्यक है, ताकि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके और नीतिगत निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2011 की जनगणना में अलग धर्म कोड का कॉलम नहीं होने के बावजूद लगभग 50 लाख लोगों ने स्वयं को सरना धर्मावलंबी के रूप में दर्ज कराया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग लंबे समय से आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़ी हुई है।

उन्होंने आगे बताया कि 11 नवंबर 2020 को झारखंड विधानसभा में सरना धर्म कोड के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजी गई थी। हालांकि, पांच वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जबकि अब देश में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जनगणना-2027 में सरना धर्म कोड को शामिल करने के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि झारखंड सहित पूरे देश के आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान हो सके और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सके।


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