देवरिया, 16 मई । महार्षि देवराहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग द्वारा शनिवार को एक जटिल एवं सफल शल्य चिकित्सा कर नौ वर्षीय बालक को नई जिंदगी की उम्मीद दी गई। बालक पिछले छह वर्षों से पुराने आघात के कारण टार्डी अल्नर नर्व पाल्सी, क्लॉ हैंड तथा दाहिने हाथ की हाइपोथेनर मांसपेशियों के क्षय जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। लंबे समय से हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित होने के कारण उसे सामान्य दैनिक कार्य करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार बच्चे की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने विस्तृत जांच, चिकित्सकीय परीक्षण और परामर्श के बाद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। इसके बाद ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम ने अत्यंत सावधानी और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए सफल सर्जरी को अंजाम दिया।
ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया के अंतर्गत किया गया, जिसमें क्यूबिटल टनल डीकंप्रेशन, सबमस्कुलर एंटीरियर ट्रांसपोजिशन ऑफ अलनार नर्व तथा प्रोनेटर टेरेस मसल की जेड-प्लास्टी जैसी जटिल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संपन्न की गईं। चिकित्सकों के अनुसार इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत तकनीकी और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसमें नसों और मांसपेशियों की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए सुधार करना होता है।
यह पूरी शल्य चिकित्सा अस्थि रोग विभाग के हेड एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजनीश कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुई। ऑपरेशन के दौरान नर्सिंग ऑफिसर गोविंद शर्मा एवं ओटी टेक्नीशियन धर्मवीर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं एनेस्थीसिया टीम में हेड एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धीरज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत शाही तथा सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकिता शामिल रहीं। टीम के कुशल समन्वय और अनुभव के कारण ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रजनी ने सफल सर्जरी पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज देवरिया लगातार आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहायता से जटिल एवं उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान क्षेत्र के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी ऐसी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं जारी रहेंगी।
