डिब्रूगढ़ (असम), 11 जून। असम सरकार के उद्योग वाणिज्य एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री बिमल बोरा ने गुरुवार को कहा कि एक्ट ईस्ट नीति के माध्यम से असम दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ भारत की कड़ी के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य के लिए व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था और आर्थिक विकास के नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
बोरा ने अपने विधायक सेवा केंद्र में टिंगखांग विधानसभा क्षेत्र के लोगों से संवाद के साथ दिन की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने हाल ही में उन्हें एक्ट ईस्ट नीति मामलों के विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसे केवल एक विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि असम को भारत के रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने की दूरदर्शी पहल बताया।
उन्होंने कहा कि एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य उद्देश्य विकास की भावी संभावनाओं को साकार करना है। इसके तहत व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का विस्तार करने तथा असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि इस नीति के परिणामस्वरूप असम के लिए नई संभावनाएं उत्पन्न हुई हैं। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच, नए निवेश, उन्नत लॉजिस्टिक व्यवस्था तथा किसानों, उद्यमियों और युवाओं के लिए नए अवसरों के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि ‘एडवांटेज असम’ इस दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि साबित हुआ है।
बोरा ने कहा कि असम अब केवल भारत की पूर्वी सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ देश के एक सशक्त संपर्क द्वार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में राज्य ‘ए फॉर असम’ के संकल्प के साथ विकास और वैश्विक सहभागिता के नए आयाम स्थापित करेगा।
