जयपुर, 10 जनवरी(हि.स.)। अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के 83वें सम्मेलन (एआईपीओसी) का आयोजन 10 से 13 जनवरी तक जयपुर में हो रहा है। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। बिरला इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उनके आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उन्हें सलामी गारद दिया।
इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान पूरे देश की विधान सभाओं और विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी जी-20 में भारत के नेतृत्व से लेकर विधायिका और न्यायपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों जैसे विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
एआईपीओसी के भाग के रूप में, भारत के विधायी निकायों के सचिवों का 59वां सम्मेलन आज राज्य विधानमंडलों में समिति प्रणाली को मजबूत करके कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने, डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से भारत के विधायी निकायों को जोड़ने और विधानमंडलों की पहुंच का विस्तार करके भारत के विधायी निकायों को लोगों के करीब लाने पर चर्चा हुई।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने विधानमंडलों द्वारा कोविड महामारी के बावजूद अपने विधायी दायित्वों का निर्वहन किए जाने की सराहना की। सिंह ने कहा कि विधानमंडलों की बैठकें हुई; कई महत्वपूर्ण कानूनों पर विचार-विमर्श किया गया और कोविड महामारी के बावजूद लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा किया गया। उन्होंने सांसदों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के सांसद सीपीए के सदस्य और कोषाध्यक्ष बने हैं जिससे भारत का गौरव बढ़ा है।
सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि विधानमंडल अपनी दक्षता और प्रभावोत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने डिजिटल संसद परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना के लागू होने के बाद, सदस्यों को एक व्यापक डिजिटल मंच उपलब्ध होगा जिससे उन्हें अपने कार्य करने में बहुत सुविधा होगी।
भारत द्वारा वर्ष 2023 में जी-20 देशों की मेजबानी के बारे में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि जी-20 के मौके पर भारत की संसद पी-20 सम्मेलन का आयोजन करेगी जिसमें जी-20 देशों के पीठासीन अधिकारी और सांसद विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगे। इस अवसर पर राज्य सभा के महासचिव पी सी मोदी और राजस्थान विधान सभा के प्रधान सचिव महावीर प्रसाद शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
बाद में, शाम को, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला एआईपीओसी की स्थायी समिति की अध्यक्षता की, जिसमें G-20 में भारत के नेतृत्व सहित सम्मेलन की कार्यसूची के अन्य मदों पर विस्तार से चर्चा की गई। लोकतंत्र की जननी के रूप में, भारत विश्व के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक आदर्श है। संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के मामलों में भारत का उदाहरण दिया जाता हैं। इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि अगले एक साल में जी-20 देशों के साथ-साथ भारत दुनिया भर के देशों में लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाए।
भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ बुधवार को सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे और विशिष्ट सभा को संबोधित करेंगे। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला; राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत; राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष, डॉ. सी.पी. जोशी उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे।
सम्मेलन में जी-20 में लोकतंत्र की जननी भारत का नेतृत्व, संसद और विधानमंडलों को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और उपयोगी बनाने की आवश्यकता, डिजिटल संसद के साथ राज्य विधानमंडलों को जोड़ने और संविधान के आदर्शों के अनुरूप विधायिका और न्यायपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के 83वें सम्मेलन का समापन सत्र 12 जनवरी को होगा। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र समापन भाषण देंगे। समापन सत्र में लोक सभा अध्यक्ष, राजस्थान के मुख्यमंत्री, राज्यसभा के उपसभापति और राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष भी शामिल होंगे।
