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सीरम इंस्टीट्यूट चीन को कोरोना वैक्सीन देने को तैयार : पूनावाला

Date : 19-Jan-2023

 - दुनिया के कई देशों के लिए उम्मीद बनकर उभरी सीरम इंस्टीट्यूट

पुणे, 19 जनवरी (हि.स.)। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि वे कोरोना वैक्सीन कोवोवेक्स और कोविशिल्ड चीन को देने को तैयार है, क्योंकि दुनिया अभी भी कोविड से उबर नहीं पा रही है। कोरोना वैक्सीन आने पर हमें लगा कि हम इस बुरे दौर से उबर जाएंगे, लेकिन चीन अभी भी कोरोना का कारण बना हुआ है। उन्होंने कहा मेरा विचार है कि चीन जल्द से जल्द इस मुसीबत से पार पा जाए, क्योंकि चीन की मौजूदा स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है और हम कोरोना के खिलाफ जंग में उनकी सफलता की कामना करते हैं। दुनिया के हर देश को, हर किसी को इस स्थिति से उबरना जरूरी है।
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि अब हमें घबराने की जरूरत नहीं है। हम अच्छी स्थिति में हैं, क्योंकि कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति देश के 90 फ़ीसदी से अधिक लोगों तक की जा चुकी है। देश के लोगों में हर्ड इम्यूनिटी भी बन चुकी है। हमारी कोरोनारोधी वैक्सीन रामबाण की तरह साबित हुई है। पूनावाला ने स्पष्ट कहा कि हम निजी और अन्य माध्यमों से चीन तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पूरा रिस्पांस नहीं मिला है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि वह इस बारे में जल्द से जल्द कोई ठोस निर्णय लेंगे। हमारी ओर से उनके (चीन के) लिए कोवोवैक्स का ऑफर इसलिए किया गया है, क्योंकि ओमीक्रोन और सबवेरिएंट के खिलाफ इसने अच्छा काम किया है। कोविशिल्ड के मुकाबले इसका दो से तीन गुना अच्छा परिणाम मिला है। इसी कारण से हमारे नागरिकों के लिए भी कोवोवैक्स ज्यादा अहम वैक्सीन है। पुरानी वैक्सीन नए स्ट्रेन के लिए कम असरदायक है ऐसे में कोवोवैक्स ज्यादा असरकारक है।
पूनावाला ने बताया कि इसे यूएसएफटीए ने मंजूरी दी है। यूरोप में भी इसे रामबाण बूस्टर के तौर पर मंजूरी दी है। बीसीसीआई ने भी इसे बूस्टर डोज के तौर पर अप्रूव किया है। उन्होंने कहा कि पहला या दूसरा डोज लेने वालों को इसे बूस्टर डोज के रूप में दिया जा सकता है। इस नई वैक्सीन की कीमत दो सौ या तीन सौ रुपये तक ही होगी, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार कोविन ऐप पर जारी करने वाली है।
सीरम इंस्टीट्यूट ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सामने मलेरिया वैक्सीन को लेकर भी डेटा पेश किया है और इस वैक्सीन ने 80 फ़ीसदी से अधिक मामलों में अपनी प्रभावशीलता दिखाई है। इस वर्ष के अंत तक अफ्रीका में इसे शुरू करने जा रहे हैं। इसके अलावा भारत में वैक्सीन के सबसे बड़े निर्माता के रूप में हमने डेंगू के लिए भी एक वैक्सीन पर काम किया है, जो क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे और तीसरे फेज में है।


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