पटना, 21 जनवरी। राज्यपाल फागू चौहान ने शनिवार को बिहार मानवाधिकार आयोग के 14 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें तथा दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करें।
राज्यपाल ने कहा कि मानवाधिकारों को किसी व्यक्ति का जन्मजात अधिकार माना जाता है। हमेशा और सभी जगह मिलने वाले ये अधिकार सबके लिए समान होते हैं तथा किसी व्यक्ति को रंग, नस्ल, धर्म, जाति, लिंग, भाषा, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति या अन्य आधारों पर इनसे वंचित नहीं किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति या राज्य किसी व्यक्ति से इन अधिकारों को छीन नहीं सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि व्यक्ति के इन्हीं अधिकारों को संरक्षित करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के द्वारा 10 दिसम्बर, 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की गयी तथा मनुष्य की गरिमा और अधिकारों के मामले में समानता दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें परस्पर भाईचारे के भाव से बर्ताव करना चाहिए।
फागू चौहान ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा किसी व्यक्ति के गरिमापूर्ण विकास, सामाजिक प्रगति व प्रतिष्ठा तथा जीवन के स्तर को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य है तथा राज्य का प्रमुख दायित्व है कि वह नागरिकों के इन अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करे। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए 10 दिसम्बर, 2008 को बिहार मानवाधिकार आयोग, पटना की स्थापना की गई। यह आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के द्वारा प्रदत्त दायित्वों एवं शक्तियों के आलोक में अपने स्थापना काल से ही मानवाधिकारों के संरक्षण में राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रहा है।
