नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों से आग्रह किया है कि वे महासागरों और इसकी जैव विविधता के संरक्षण एवं सुरक्षा के साथ-साथ सतत आर्थिक विकास तथा महासागरों के कानून पर संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के अंतर्गत तटीय लोगों की भलाई के लिए समर्पित रहें। केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक प्रारूप वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन (यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ सीज- यूएनसीएलओएस) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कानूनी गठबंधन का समर्थन किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत का विधायी ढांचा अर्थात "2002 का जैव विविधता अधिनियम" इन मूल्यों का साक्षी है और हम वैश्विक संगठनों के उन सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो संरक्षण पर एक मजबूत एवं प्रभावी समझौते को प्राप्त करने और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में समुद्री जैव विविधता के सतत उपयोग वाले साझा उद्देश्य की दिशा में काम करते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने प्रारूप वक्तव्य में संरक्षित और लचीला महासागर सुनिश्चित करने के लिए एक वैश्विक समझौता करने तथा चल रही जैव विविधता से परे राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र (बायोडाइवरसिटी बियॉन्ड नेशनल ज्यूरिडिक्शन्स – बीबीएनजे) वार्ताओं के शीघ्र निष्कर्ष के लिए विस्तारित समर्थन और एक ऐसे मजबूत ढांचे के बल में प्रवेश करने की इच्छा व्यक्त की, जो संरक्षण, स्थायी उपयोग उससे उत्पन्न होने वाले लाभों को न्यायसंगत रूप से साझा कर सके।
उन्होंने कहा कि समुद्री संरक्षित क्षेत्रों, महासागरीय आनुवंशिक संसाधनों और समान लाभ साझा करने, क्षमता निर्माण एवं महासागर प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण एवं पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन जैसे प्रमुख तत्वों के अलावा भारत का मानना है कि एक मजबूत लोकतांत्रिक तरीके से नए संस्थानों की स्थापना अथवा वर्तमान संस्थानों द्वारा एक मजबूत लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज किया जाना कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं ।
