नई दिल्ली, 17 मार्च । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी ने शुक्रवार को इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद की अधिकृत आत्मकथा ‘सिंग, डांस एंड प्रे: द इंस्पिरेशनल स्टोरी ऑफ श्रील प्रभुपाद’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। डॉ. हिंडोल सेनगुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक का प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किया है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी ने कहा कि भारत को एक आध्यात्मिक लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है। श्रील प्रभुपाद ने हमें 21वीं सदी में आध्यात्मिकता की प्रासंगिकता सिखाई। यह पुस्तक भारत के उस आंदोलन में एक महान तरीके से योगदान देगी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बताती है कि कैसे श्रील प्रभुपाद ने 69 वर्ष की आयु में अमेरिका की यात्रा की, यह संदेश देते हुए कि कुछ भी नया शुरू करने में कभी देर नहीं होती। उन्होंने भगवद-गीता के महत्व के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि हम एक राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय हैं। हम एक ऐसी संस्था हैं जो इस्कॉन के समानता के साथ उत्कृष्टता, समानता के साथ सहानुभूति, और अंतज्र्ञान के साथ अखंडता सहित कई सिद्धांतों में विश्वास करती है। यह पुस्तक बहुत ही स्पष्ट रूप से बड़ी स्पष्टता के साथ लिखी गई है, जिससे लोगों को समझने में आसानी होती है।
श्रील प्रभुपाद की जीवनी प्राचीन भारत से लेकर 20वीं सदी के अमेरिका तक की कालातीत आध्यात्मिक संस्कृति को दर्शाती है। उस जमाने में तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बीसवीं शताब्दी के 60 और 70 के दशक में जिस आध्यात्मिक-सांस्कृतिक जागरण की शुरूआत की उसका प्रभाव यूरोप और अमेरिका में गहराता ही जा रहा है। उनकी जीवनी से संबंधित इस पुस्तक को दुनिया भर के विद्वानों, विचारकों और नेताओं से सर्वसम्मति से प्रशंसा मिली है।
अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष चंचलपति दास ने इस प्रतिष्ठित संस्थान में आज श्रील प्रभुपाद की जीवनी का विमोचन करने के लिए वाइस चांसलर का धन्यवाद। यह आयोजन हमारे देश के युवाओं तक श्रील प्रभुपाद के संदेश को पहुंचाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. ए.एस. हिंडोल सेनगुप्ता ने इस पुस्तक में श्रील प्रभुपाद के जीवन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शानदार ढंग से अंकित किया है। यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा और उन्हें जीवन की चुनौतियों से पार पाने के लिए प्रेरित करेगा।
