केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव आज हरियाणा के गुरुग्राम में एन.एफ.टी., आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मेटावर्स के युग में अपराध और साइबर सुरक्षा पर जी-20 सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे।
कल सम्मेलन के पहले दिन जी-20 देशों और विभिन्न निकायों के प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों द्वारा साइबर अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया। सदस्यों ने इंटरनेट गवर्नेंस, डी.पी.आई. सुरक्षित करने, मेटावर्स और डिजिटल स्वामित्व पर आयोजित तीन तकनीकी सत्रों के दौरान साइबर अपराध के खतरे से निपटने और साइबर स्पेस को सुरक्षित करने की रणनीतियों को साझा किया। आज सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्रिप्टोकरेंसी, डार्क नेट और आई.सी.टी. के आपराधिक उपयोग की चुनौतियों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डार्क नेट, क्रिप्टो करेंसी, मनी लॉन्ड्रिंग, बाल शोषण और सूचना साझाकरण पर चर्चा करेंगे।
अपने उद्घाटन भाषण में, केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साइबर हमलों और डार्क नेट, वर्चुअल एसेट्स और मेटावर्स के दुरुपयोग से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरक्षा चुनौतियों का 'डायनामाइट से मेटावर्स' और 'हवाला से क्रिप्टो करेंसी' में बदलना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हिंसा करने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और वित्तीय संसाधन जुटाने के नए तरीके ढूंढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों द्वारा वित्तीय लेनदेन के लिए नए तरीकों और उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है जो सुरक्षा तंत्र और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। इन गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताते हुए, श्री शाह ने सभी से मिलकर काम करने और वर्तमान में साइबर खतरे की खुफिया जानकारी साझा करके एक मजबूत तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी देशों की साइबर एजेंसियों के बीच अधिक समन्वय होने पर बल दिया।
