नई दिल्ली, 20 जुलाई । भारत के सीमावर्ती शहर से नेपाल की राजधानी काठमांडू को जोड़ने वाले विद्युतीय रेलमार्ग की अंतिम सर्वे रिपोर्ट नेपाल को सौंप दी गई है। गेटवे ऑफ नेपाल के नाम से चर्चित बिहार के रक्सौल से काठमांडू तक के रेल मार्ग की फाइनल लोकेशन सर्वे रिपोर्ट नेपाल सरकार के रेलवे विभाग को सौंप दी गई है। नेपाल की हरी झण्डी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक दृष्टि से नेपाल के लिए अति महत्वपूर्ण रहे इस विद्युतीय ब्रॉडगेज रेलमार्ग का फाइनल सर्वे भारत सरकार के ही आर्थिक सहयोग से कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने किया है। नेपाल का रेल विभाग इस प्रतिवेदन का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही अपने सुझाव के साथ इस प्रतिवेदन को भारत सरकार को सौंपने वाला है।
नेपाल रेल विभाग के महानिदेशक रोहित कुमार बिसुराल ने बताया कि 140.79 किलोमीटर लम्बे इस रेलमार्ग में 41 किमी. लम्बी सुरंग बनाने का प्रस्ताव सर्वे में किया गया है। बिसुराल के मुताबिक रक्सौल से काठमांडू तक के रेलमार्ग में कुल 101 बड़े पुल और 122 छोटे पुल बनाए जाने की आवश्यकता प्रतिवेदन में बताई गई है। इसमें 18 पुलों को भौगोलिक दृष्टि से अत्यन्त ही कठिन माना गया है।
कोंकण रेलवे द्वारा तैयार की गई अंतिम प्रतिवेदन में रक्सौल से काठमांडू तक कुल 12 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। भौगोलिक और इंजीनियरिंग रूप से अत्यन्त ही जटिल रहे इस विद्युतीय रेलमार्ग के निर्माण पर कुल 2390 करोड़ रुपये लागत का अनुमान है। रेलमार्ग सहित अन्य भौतिक संरचना के निर्माण पर कुल 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नेपाल रेलवे विभाग के महानिदेशक रेहित कुमार बिसुराल ने कहा कि इस रेलमार्ग के बनने के बाद ना सिर्फ दोनों देशों के यात्रियों को काठमांडू तक आने जाने में सुविधा होगी बल्कि व्यापारिक दृष्टि से भी यह परियोजना काफी लाभदायक रहने वाली है। नेपाल का 70 प्रतिशत व्यापार आयात निर्यात सब भारत से ही होता है।
नेपाल उद्योग वाणिज्य संघ के अशोक टेमानी का कहना है कि इस रेल मार्ग के बन जाने के बाद नेपाल का व्यापार घाटा तो कम होगा ही महंगाई भी बहुत हद तक कम होने से भी लोगों को राहत मिलेगी। नेपाल को पर्यटन की दृष्टि से भी इस रेलमार्ग से काफी लाभ मिलने वाला है।
