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उज्जैन में धूमधाम से निकली भगवान महाकाल की श्रावण-भाद्रपद मास की पांचवीं सवारी

Date : 11-Aug-2025

बाबा महाकाल ने पांच स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन, भोले-शंभू के जयकारों से गुंजी सम्पूर्ण अवंतिका नगरी
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्‍वर की श्रावण/भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारी के क्रम में सोमवार को पांचवीं सवारी धूमधाम से निकाली गई। इस दौरान अवंतिकानाथ ने पांच स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन दिए। बाबा महाकाल पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नन्दी रथ पर श्री उमा-महेश और श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद डोल रथ पर विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले और अपनी प्रजा का हाल जाना। सवारी में जनजातीय समूहों के कलाकारों द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। सवारी के दौरान भोले-शंभू के जयकारों से सम्पूर्ण अवंतिका नगरी गुंजायमान हो उठी।

परम्परानुसार सायं 04 बजे भगवान महाकाल की पांचवीं सवारी धूमधाम से निकली। सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का षोडोपचार पूजन अर्चन किया गया। पूजन शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने सम्पन्न कराया। सभामंडप में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति कलावती यादव, संजय अग्रवाल, माखन सिंह चौहान, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, एडीएम प्रथम कौशिक आदि ने भी भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। सभी गणमान्य नागरिकों ने पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण हेतु रवाना किया।

सभामंडप में पूजन उपरांत अवंतिकानाथ भगवान श्री चंद्रमौलीश्वर के स्वरूप में पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा रजत पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमौलीश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी में लाखों भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए तथा विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे।

सवारी अपने परम्परागत मार्ग से होती हुई शाम 6 बजे रामघाट पहुँची, जहाँ मॉं क्षिप्रा के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। पूजन-अभिषेक व आरती उपरांत सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर पहुंची, जहॉ सिंधिया ट्रस्ट के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया गया। इसके पश्चात सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहे से होती हुई पुनः महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने के पश्चात सवारी का विश्राम हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की मंशानुरूप बाबा महाकाल की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए चार जनजातीय कलाकारों के दलों ने सहभागिता की। इनमें बैतूल से मिलाप इवने के नेतृत्व में गोण्ड जनजातीय ठाट्या नृत्य, खजुराहो से गणेश रजक के नेतृत्व कछियाई लोक नृत्य, दमोह से पंकज नामदेव नेतृत्व में बधाई लोक नृत्य एवं डिण्डोरी के सुखीराम मरावी के नेतृत्व गेडी जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियां देते हुए सम्मिलित हुए। यह सभी दल सवारी के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चले।

श्रावण-भादौ माह 2025 में भगवान महाकाल की नगर भ्रमण पर निकलने वाली सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन के अंतर्गत श्री राजाराम लोक ओरछा, सर्वसिद्धि श्री माँ बगलामुखी माता मंदिर, माँ शारदा शक्तिपीठ मैहर एवं देवीलोक माँ बिजासन धाम सलकनपुर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जिनका निर्माण धार्मिक एवं न्यास एवं अध्यात्म विभाग के माध्यम से किया गया।

बाबा महाकाल की सवारी में दी गई हर घर तिरंगा अभियान की जानकारी

बाबा महाकाल की पांचवी सवारी में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देशानुसार श्रद्धालुओं को हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता अभियान की जानकारी दी गई। अभियान को जन अभियान बनाने के लिए जानकारी देकर श्रद्धालुओं से अभियान से जुड़ने का आग्रह किया गया। सवारी में हर घर तिरंगा अभियान,हर घर स्वच्छता कार्यक्रम अन्तर्गत स्वच्छता कर्मियों द्वारा सवारी निकलने के तुरंत बाद मार्गो की साफ़ सफ़ाई कर हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ने और स्वच्छता का संदेश दिया गया।

महाकालेश्वर भगवान की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में अंतिम व राजसी सवारी आगामी 18 अगस्त को निकलेगी। इस दौरान पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं डोल रथ पर श्री सप्तधान का मुखारविंद सम्मिलित रहेगा। राजसी सवारी में परम्परागत 09 भजन मण्डलियों को मिलाकर कुल 70 भजन मण्डलियां सम्मिलित होंगी।


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