प्रेरक प्रसंग: धर्माचरण का महत्व जानें | The Voice TV

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प्रेरक प्रसंग: धर्माचरण का महत्व जानें

Date : 29-Jul-2025

हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य शेख उस्मान खैराबादी बड़े ही धर्मनिष्ठ और विद्वान् थे। वे जीविकोपार्जन के लिए सब्जी बनाकर बेचा करते। यदि बदले में कोई खोट सिक्का भी दे जाता तो वे चुपचाप जान-बूझकर उसे रख लेते और सब्जी दे देते। इससे लोगों की यह आम धारणा हो गयी कि उन्हें खरे-खोटे की परख नहीं है और यह जान-कर लोग उन्हें जान-बूझकर खोटे सिक्के दे जाया करते।

 

अन्त समय में शेख आसमान की ओर मुँह कर बोले, "ऐ परवरदिगार ! तू भलीभाँति जानता है कि लोग मुझे खोटे सिक्के दे दिया करते थे और मैं उन्हें रख लेता था। एक बार भी मैंने खोटा सिक्का किसी को वापस नहीं किया। अगर अनजाने में मुझसे कोई खोटा काम हो गया होतो तू भी इस खोटे बन्दे को दूर न फेंकअपनी रहमत में रख लेना। मेरे रहीम ! तेरे यहाँ तो कितने ही खरे बन्दे होंगेवहाँ मुझ जैसा एक खोटा बन्दा भी कहीं न कहीं पड़ा रहेगा।"


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