नेपाल में उद्योगपतियों और व्यापारियों की धरपकड़ पर निजी क्षेत्र ने आपत्ति जताई | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

International

नेपाल में उद्योगपतियों और व्यापारियों की धरपकड़ पर निजी क्षेत्र ने आपत्ति जताई

Date : 24-Apr-2026

 काठमांडू, 24 अप्रैल । नेपाल में उद्योगपतियों और व्यवसायियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से निजी क्षेत्र में भय का माहौल बन गया है।नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के पूर्व अध्यक्ष शेखर गोलछा की गिरफ्तारी के बाद निजी क्षेत्र ने शुक्रवार को सरकार की कार्यशैली पर आपत्ति जताई है।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के पूर्व अध्यक्ष शेखर गोलछा की गुरुवार को गिरफ्तारी की गई थी। इससे पहले नेपाल के एक और बड़े उद्योग घराने शंकर ग्रुप के अध्यक्ष शंकर अग्रवाल और एमडी सुलभ अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, नेपाल उद्योग परिसंघ और नेपाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने शुक्रवार को संयुक्त बयान में कहा है कि केवल नियामक निकायों की रिपोर्ट के आधार पर उद्योगपतियों और व्यवसायियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आर्थिक अपराध के मामलों में पहले संबंधित पक्ष की बात सुनी जाए और अपराध साबित होने के बाद ही गिरफ्तारी की जाए।

निजी क्षेत्र का कहना है कि नई सरकार बनने के बाद देश में स्थिरता कायम होने और निवेश का माहौल बनने की उम्मीद थी, लेकिन उद्यमियों और व्यवसायियों पर हो रही गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाइयों ने उन्हें हतोत्साहित कर दिया है। उनका तर्क है कि अर्थव्यवस्था में 81 प्रतिशत और रोजगार में 86 प्रतिशत योगदान देने वाले निजी क्षेत्र को अगर डर का माहौल झेलना पड़ेगा, तो इसका गंभीर असर अर्थव्यवस्था, रोजगार, राजस्व और बुनियादी ढांचा निर्माण पर भी पड़ेगा।

बयान में कहा गया है कि उद्यमी जांच में सहयोग करने और पुलिस के बुलावे पर उपस्थित होने के लिए तैयार थे, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक अपराध के मामलों में गिरफ्तारी किए जाने से पूरा निजी क्षेत्र चिंतित और दुखी है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि लाखों रोजगार, आपूर्ति श्रृंखला, बैंकिंग क्षेत्र और पूरी आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे देश गंभीर आर्थिक संकट में पड़ सकता है।

निजी क्षेत्र ने यह भी कहा कि सरकार हाल में नीति और कानून निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ा रही है, जिसे सकारात्मक कदम माना गया था। मंत्रिपरिषद ने निजी क्षेत्र संरक्षण एवं प्रवर्द्धन रणनीति को भी मंजूरी दी है, लेकिन इसी दौरान हो रही गिरफ्तारियों ने निजी क्षेत्र को और अधिक चिंतित कर दिया है। बयान में कहा गया है कि अगर कोई दोषी साबित होता है, तो उसे कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए। इस पर निजी क्षेत्र की कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन संविधान द्वारा दिए गए सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार और दोष साबित होने तक किसी को अपराधी न मानने के सिद्धांत का पालन होना चाहिए।

करीब चार वर्षों से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को नई सरकार की नीतियों और व्यवसायी-हितैषी रवैये से गति मिलने की उम्मीद निजी क्षेत्र ने जताई थी। हालांकि, उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से निवेश बढ़ाने और निवेशकों को सुरक्षित महसूस कराने के प्रयास प्रभावित नहीं होने चाहिए।निजी क्षेत्र ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि देश की समृद्धि केवल निजी निवेश और उद्यमियों के उत्साह से ही संभव है, इसे गंभीरता से समझा जाए।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement