ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (GTRI) ने भारत से आयातित वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। GTRI ने इस कदम को पक्षपातपूर्ण और पाखंडपूर्ण बताते हुए अमेरिका के अपने सहयोगी देशों के साथ रूस व्यापार को लेकर अपनाए गए "चयनात्मक दृष्टिकोण" पर सवाल उठाए हैं।
यह आलोचना उस घोषणा के बाद सामने आई है, जिसमें अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर पहले से लागू 25 प्रतिशत शुल्क के अलावा अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। यह बढ़ा हुआ कुल 50 प्रतिशत शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा।
GTRI ने अपने बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में चीन ने रूस से 62.6 अरब डॉलर मूल्य का तेल आयात किया, जबकि भारत ने इसी अवधि में 52.7 अरब डॉलर का तेल आयात किया। इसके बावजूद चीन पर किसी प्रकार का दंडात्मक शुल्क नहीं लगाया गया है।
संस्थान ने आगे बताया कि अमेरिका ने यूरोपीय संघ के देशों द्वारा रूस से किए गए 39.1 अरब डॉलर के आयात (जिसमें 25.2 अरब डॉलर का तेल शामिल है) को भी नजरअंदाज़ किया है। सबसे हैरानी की बात यह है कि अमेरिका ने स्वयं भी 2024 में रूस से 3.3 अरब डॉलर की सामरिक सामग्री का आयात किया है।
GTRI का मानना है कि यह नीति स्पष्ट रूप से दोहरे मापदंडों को दर्शाती है, जिसमें भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य बड़े देशों के रूस के साथ व्यापार को अनदेखा किया जा रहा है। संस्थान ने वैश्विक व्यापार नीतियों में निष्पक्षता और समानता की मांग की है।
